Published:
17 Feb 2026, 10:43 AM
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Updated:
17 Feb 2026, 10:52 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
देहरादून। राजधानी देहरादून में तकनीक का सहारा लेना अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। लोग मामूली सर्दी-खांसी या दर्द होने पर सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म से इलाज पूछ रहे हैं और वहीं से सुझाई गई दवाएं ले रहे हैं। इस 'शॉर्टकट' के दुष्परिणाम अब दून अस्पताल की ओपीडी में साफ नजर आने लगे हैं, जहां हर दिन औसतन 15 मरीज दवाओं के रिएक्शन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
त्वचा पर खुजली: एआई की सुझाई दवाओं के गलत कॉम्बिनेशन से मरीजों की स्किन पर लाल चकत्ते और खुजली हो रही है।
चेहरे पर सूजन: कई मामलों में गलत एंटीबायोटिक या पेनकिलर लेने से चेहरे और आंखों पर भारी सूजन देखी जा रही है।
असामान्य घबराहट: गलत डोज या दवा के कारण मरीजों को घबराहट और एलर्जी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुण पांडेय ने इस बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई है। उनके अनुसार एआई और इंसान (डॉक्टर) के बीच का अंतर समझना जरूरी है:
शारीरिक जांच का अभाव: एआई केवल डेटा और लक्षणों पर काम करता है, वह मरीज की नब्ज नहीं देख सकता और न ही शारीरिक जांच कर सकता है।
नाम में भ्रम: कई दवाओं की स्पेलिंग और नाम एक जैसे होते हैं। एआई द्वारा सुझाई गई गलत स्पेलिंग वाली दवा मौत का कारण बन सकती है।
मेडिकल हिस्ट्री: दवा देने से पहले डॉक्टर मरीज का बीपी, शुगर लेवल और पुरानी बीमारियों को देखता है, जिसे एआई नजरअंदाज कर देता है।
डॉक्टरों ने बताया कि केवल दवा ही नहीं, लोग अपनी लैब रिपोर्ट भी एआई के जरिए समझने की कोशिश कर रहे हैं। एआई रिपोर्ट के आंकड़ों के आधार पर बीमारियों की एक लंबी सूची थमा देता है, जिससे मरीजों में बेवजह का खौफ पैदा हो रहा है। इस डर के कारण कई लोग जरूरी सर्जरी या इलाज बीच में ही छोड़ने जैसे गलत फैसले ले रहे हैं।
"एआई एक सहायक तकनीक हो सकती है, लेकिन यह डॉक्टर का विकल्प कभी नहीं बन सकती। पिछले डेढ़ साल में ऐसे मामलों में भारी उछाल आया है जो डराने वाला है।" — डॉ. अरुण पांडेय, वरिष्ठ चिकित्सक
अपील: इंटरनेट पर नहीं, विशेषज्ञ पर करें भरोसा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दूनवासियों से अपील की है कि वे एआई या इंटरनेट आधारित सुझावों को 'अंतिम सच' न मानें। शरीर एक जटिल मशीन है और इसकी मरम्मत केवल एक योग्य चिकित्सक ही कर सकता है। समय रहते सही परामर्श लेना ही गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचने का एकमात्र तरीका है।
