Published:
20 Feb 2026, 12:38 PM
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Updated:
20 Feb 2026, 12:40 PM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
बस्ती। "मेरे सिर से मां-बाप का साया उठ गया, अब अपना ही घर मुझसे छीनने की साजिश हो रही है।" यह रुंधा हुआ गला उस पीड़ित का है, जो शहर के पिकौरा दत्तू राय (मकान संख्या 143) का मालिक तो है, लेकिन आज अपने ही घर की दहलीज पार करने से डर रहा है। विख्यात रंजन उर्फ अभिमन्यु पुत्र स्वर्गीय राम प्रसाद श्रीवास्तव ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर अपनी जान-माल की सुरक्षा और घर को 'कब्जा मुक्त' कराने की भावुक अपील की है।
पीड़ित अभिमन्यु का आरोप है कि उनके मकान में रह रहे किरायेदार रत्नेश शुक्ला, अनुराग शुक्ला और संजय सिंह उनकी लाचारी का फायदा उठा रहे हैं। मामला पुराना है; जब कोतवाली थाने में शिकायत हुई थी, तो इन किरायेदारों ने लिखित रूप में दो से तीन महीने में घर खाली करने का वादा किया था। लेकिन समय बीत गया, समझौते की शर्तें कागजों तक सीमित रह गईं और किरायेदार अब घर छोड़ने के बजाय धमकियों पर उतारू हैं।
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित ने 1 नवंबर 2025 को ही थाना कोतवाली में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी। बावजूद इसके, महीनों बीत जाने पर भी पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अभिमन्यु का कहना है कि रसूखदार किरायेदार उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। वह अपने ही घर के एक कोने में सिमट कर रह गए हैं और प्रशासन की चुप्पी ने उन्हें और अधिक डरा दिया है।
अभिमन्यु ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "मैं घर में बिल्कुल अकेला हूं। वे लोग किसी भी वक्त मेरे साथ अनहोनी कर सकते हैं। मैंने कई बार पुलिस से सुरक्षा मांगी, लेकिन मेरी सुनने वाला कोई नहीं है।" पीड़ित ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों और प्रशासन की होगी।
किसी लाचार व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी हनन है। जब रक्षक ही हाथ पर हाथ धरे बैठे हों, तो आम आदमी कहां जाए? उम्मीद है कि एसपी की दखल के बाद इस अनाथ युवक को उसकी अपनी छत वापस मिलेगी।
