Published:
13 Mar 2026, 12:21 PM
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Updated:
13 Mar 2026, 12:34 PM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में ऐसा झटका लगा जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुक्रवार को बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली और दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1470.50 अंक यानी 1.93% गिरकर 74,563.92 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 488.05 अंक यानी 2.06% लुढ़ककर 23,151.10 पर आ गया।
इस तेज गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 10 लाख करोड़ रुपये घट गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति पलक झपकते ही कम हो गई।
शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे गिरकर 92.45 पर पहुंच गया, जो अब तक का ऐतिहासिक निचला स्तर माना जा रहा है। इससे आयात लागत और महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण हैं:
पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली
अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
इन सभी कारकों ने मिलकर निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ऐसे उतार-चढ़ाव को अक्सर खरीदारी के अवसर के रूप में भी देखा जाता है, लेकिन फिलहाल बाजार में सतर्कता बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है।
