भूपेंद्र यादव का बड़ा बयान—‘सिल्क्यारा विजय अभियान’ आपदा प्रबंधन में भारत की ऐतिहासिक सफलता

Published: 29 Nov 2025, 05:59 AM   |   Updated: 29 Nov 2025, 05:58 AM
Category: राष्ट्रीय   |   By: Admin

उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन–2025 के उद्घाटन दिवस पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर की संस्थाओं के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है।

“उत्तराखंड ने 25 वर्षों में वैश्विक स्तर पर बनाई पहचान”

भूपेंद्र यादव ने उत्तराखंड राज्य की स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर जनता को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि चुनौतियों के बावजूद राज्य ने 25 वर्षों में राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक प्रगतिशील पहचान स्थापित की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को विकास की नई दिशा प्रदान की है।

यादव ने हिमालय को भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और जैव विविधता की धरोहर बताते हुए कहा कि हिमालय से निकली नदियाँ सदियों से भारतीय सभ्यता की आधारशिला रही हैं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय पटल पर हिमालय को केंद्र में रखने की आवश्यकता है।

वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता

अपने संदेश में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और मानवजनित कारणों से विश्वभर में आपदाओं की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसके लिए वैश्विक स्तर पर ठोस रणनीति बनना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित10 सूत्रीय कार्यक्रमको अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलना भारत की नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलियंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) जैसे वैश्विक संगठन की स्थापना कर आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

“सिल्क्यारा विजय अभियान पूरे विश्व के लिए प्रेरणा”

भूपेंद्र यादव ने कहा कि “सिल्क्यारा विजय अभियान” ने सिद्ध कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में मजबूत इच्छाशक्ति, कुशल नेतृत्व और वैज्ञानिक दक्षता असंभव को भी संभव बना सकती है। यह अभियान दुनिया के देशों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित आपदा न्यूनीकरण, पूर्वानुमान और पूर्व-तैयारी को मजबूत करना आवश्यक है। आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही भविष्य की आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

सम्मेलन से महत्वपूर्ण रणनीतियों की उम्मीद

अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से निकलने वाले विचार, शोध और सुझाव न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे और बहु-आपदा केंद्रित रणनीतियों के विकास में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएँगे।
उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजकों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ भी दीं।

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