Published:
18 Feb 2026, 10:49 AM
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Updated:
18 Feb 2026, 10:50 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
बिंदुखत्ता/लालकुआं। वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे बिंदुखत्ता की जनता का सब्र आज बांध तोड़कर सड़कों पर बह निकला। संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर आयोजित महारैली ने यह साबित कर दिया कि राजस्व गांव के दर्जे की मांग अब केवल कागजों और ज्ञापनों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। सुबह से ही क्षेत्र के हर कोने से आ रही भीड़ ने सत्ता के गलियारों तक अपनी धमक पहुंचा दी है।
सुबह से ही जुटने लगी भीड़, ट्रैक्टरों से पटा मैदान बुधवार सुबह 10 बजे का वक्त था, जब बिंदुखत्ता के विभिन्न सेक्टरों से ग्रामीणों का हुजूम उमड़ना शुरू हुआ। कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार था, तो कोई निजी वाहनों और पैदल ही हाथ में झंडे लेकर 'जड़ सेक्टर' मैदान की ओर बढ़ रहा था। देखते ही देखते जनता इंटर कॉलेज का विशाल मैदान खचाखच भर गया। बुजुर्गों के अनुभव, युवाओं के जोश और महिलाओं की भारी भागीदारी ने इस रैली को ऐतिहासिक बना दिया।
देशभक्ति गीतों ने भरी हुंकार मंच से जब “ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के” जैसे क्रांतिकारी और देशभक्ति गीत गूंजे, तो पूरा माहौल भावनात्मक ऊर्जा से भर उठा। ‘भारत माता की जय’ और ‘बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाओ’ के नारों से आसमान गुंजायमान रहा। वक्ताओं ने कहा कि राजस्व दर्जा न होने के कारण ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं और भूमि अधिकारों से वंचित हैं, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की तड़प स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिक संगठनों के पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक बाधाओं और भूमि के मालिकाना हक न होने से क्षेत्र का विकास ठप पड़ा है। वन अधिकार समिति ने भी आंदोलन को खुला समर्थन दिया। रैली में मौजूद मातृशक्ति ने कहा कि यह हमारे बच्चों के भविष्य की लड़ाई है और जब तक अधिकार नहीं मिलता, हम पीछे नहीं हटेंगे।
सरकार को अंतिम अल्टीमेटम आयोजकों ने मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि यह रैली सरकार के लिए चेतावनी है। यदि शीघ्र ही राजस्व गांव का शासनादेश जारी नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। महारैली में कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर ग्रामीणों की मांग को जायज ठहराया।
आज की भीड़ ने राजनीतिक दलों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। बिंदुखत्ता की जनता ने साफ कर दिया है कि अब वोट उसी को मिलेगा जो उन्हें विकास की गारंटी और जमीन का हक दिलाएगा।
