बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की फाइल फिर सक्रिय: चुनाव से पहले CM धामी ने पुनर्जीवित की घोषणा, क्या 40 साल का इंतजार होगा खत्म?

Published: 28 Feb 2026, 08:30 AM   |   Updated: 28 Feb 2026, 08:30 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

लालकुआं (नैनीताल): चार दशक से अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रहे बिंदुखत्ता के निवासियों के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच, बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक पटल पर छा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के विशेष अनुरोध पर पूर्व में फाइलों में ठंडे बस्ते में डाल दी गई मुख्यमंत्री घोषणा को पुनर्जीवित करने की मंजूरी दे दी है।

फाइलों में कैद था 'अधिकार', अब उम्मीद जगी

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग कोई नई नहीं है। इस प्रक्रिया को पहले मुख्यमंत्री घोषणा के तहत शुरू किया गया था, लेकिन क्षेत्र के वन भूमि श्रेणी में आने और भारत सरकार से आवश्यक वन विभाग की अनापत्ति (एनओसी) न मिलने के कारण मामला कानूनी और प्रशासनिक पेचीदगियों में उलझकर रह गया।

लंबी प्रक्रिया और नीतिगत फैसले न हो पाने के कारण, जुलाई 2025 में राजस्व विभाग ने इस घोषणा को सूची से विलोपित (हटाने) का प्रस्ताव भेज दिया था, जिससे क्षेत्रवासियों को बड़ा झटका लगा था।

चुनावी माहौल में पुनर्जीवित घोषणा: 'राजनीतिक दांव या हकीकत?'

अब, जबकि चुनाव नजदीक हैं, उसी घोषणा को पुनर्जीवित करने के फैसले पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। इसे “घोषणा बनाम हकीकत” की राजनीति बताते हुए पूछा जा रहा है कि वर्षों पुरानी और अत्यंत संवेदनशील मांग पर ठोस निर्णय चुनाव के मुहाने पर ही क्यों लिया जाता है?

जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिंदुखत्ता अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभावनाओं का केंद्र बन चुका है। क्षेत्रवासियों में उम्मीद है कि इस बार चुनाव से पहले ठोस कार्रवाई होगी, लेकिन साथ ही संशय भी है कि क्या वन संबंधी बाधाएं इतनी जल्दी दूर हो पाएंगी?

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह घोषणा धरातल पर उतरेगी या फिर बिंदुखत्ता की फाइल अगली चुनावी दस्तक तक के लिए इंतजार करेगी।

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