वादाखिलाफी का आरोप: बिन्दुखत्ता में भड़का जनाक्रोश; कांग्रेस और माले ने घेरी सरकार, विधायक डॉ. मोहन बिष्ट का पुतला दहन

Published: 26 Feb 2026, 09:17 AM   |   Updated: 26 Feb 2026, 09:18 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

लालकुआं/बिन्दुखत्ता। बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने का मुद्दा एक बार फिर चुनावी वादों और दावों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। 25 फरवरी को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस संबंध में कोई प्रस्ताव न लाए जाने से क्षेत्र की जनता और विपक्षी दलों का धैर्य जवाब दे गया है। गुरुवार को इंडिया गठबंधन के बैनर तले कांग्रेस और भाकपा (माले) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन करते हुए क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन बिष्ट और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

'कैबिनेट का दावा निकला हवा' – वक्ताओं का तीखा प्रहार कार रोड चौराहे पर आयोजित विरोध सभा में वक्ताओं ने विधायक डॉ. मोहन बिष्ट को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि विधायक ने सार्वजनिक रूप से वीडियो जारी कर दावा किया था कि 25 फरवरी की कैबिनेट में बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा मिल जाएगा। 18 फरवरी की संघर्ष समिति की रैली को रोकने के लिए जनता को गुमराह किया गया, लेकिन कैबिनेट की कार्यवाही में बिन्दुखत्ता का नाम तक नहीं आया।

विधायक से मांगी माफी, गैरसैण सत्र पर टिकी निगाहें आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि अगर दस्तावेज पूरे नहीं थे, तो पिछले चार वर्षों से जनता को झूठे आश्वासन क्यों दिए जा रहे थे? उन्होंने मांग की कि:

  • 9 मार्च से गैरसैण में शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में राजस्व गांव का विधिवत प्रस्ताव पारित किया जाए।

  • वन भूमि को राजस्व भूमि में हस्तांतरित करने का प्रस्ताव तुरंत केंद्र सरकार को भेजा जाए।

  • अपनी विफलता को स्वीकार करते हुए विधायक क्षेत्र की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

1 मई से आर-पार की जंग का ऐलान प्रदर्शनकारियों ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 30 अप्रैल 2026 तक राजस्व गांव बनाने की अधिसूचना जारी नहीं हुई, तो 1 मई से पूरे क्षेत्र में एक निर्णायक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। पुतला दहन के दौरान कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे अपने हक की लड़ाई को अब सड़कों पर लड़ेंगे।

प्रदर्शन में ये रहे मौजूद: डॉ. कैलाश पाण्डेय (भाकपा माले जिला सचिव), पुष्कर दानू (ब्लॉक अध्यक्ष कांग्रेस), गिरधर बम, मीना कपिल, कुन्दन मेहता, पुष्कर दुबड़िया, राजेन्द्र खनवाल, हरीश बिसोती, प्रमोद कलोनी, किशन बघरी, गोविंद जीना सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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