चारधाम यात्रा 2026: अब 'फ्री' नहीं होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, श्रद्धालुओं को चुकाना होगा शुल्क; फर्जीवाड़े पर लगाम कसने को सरकार का बड़ा फैसला

Published: 17 Feb 2026, 10:19 AM   |   Updated: 17 Feb 2026, 10:22 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

देहरादून। विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को सुव्यवस्थित करने और फर्जी पंजीकरण (Fake Registration) के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। अब तक निःशुल्क रहने वाली ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के लिए श्रद्धालुओं को अब शुल्क देना होगा। शासन का मानना है कि इस कदम से अनावश्यक स्लॉट बुकिंग पर रोक लगेगी और वास्तविक श्रद्धालुओं को दर्शन में आसानी होगी।

क्यों लिया गया यह फैसला? (Key Highlights)

  • फर्जीवाड़े पर वार: बीते वर्षों में देखा गया कि कई लोग या एजेंसियां थोक में फर्जी पंजीकरण करा लेते थे, जिससे यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन में भारी दिक्कतें आती थीं।

  • शुल्क का प्रस्ताव: गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि पंजीकरण के लिए न्यूनतम 10 रुपये शुल्क लेने का सुझाव दिया गया है।

  • समिति का गठन: अंतिम शुल्क कितना होगा, यह तय करने के लिए गढ़वाल डिवीजन के एडिशनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाई गई है।

    कैसे लागू होगी नई व्यवस्था?

    समिति अपनी रिपोर्ट में शुल्क की व्यवहार्यता और उससे जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगी। समिति की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे आगामी यात्रा सीजन से लागू कर दिया जाएगा।

    चारधाम यात्रा: आस्था और कठिन डगर का संगम

    हिमालय की गोद में स्थित चारधाम यात्रा न केवल आध्यात्मिक शांति का मार्ग है, बल्कि यह एक कठिन भौगोलिक चुनौती भी है:

    1. यात्रा का क्रम: परंपरा के अनुसार, यात्रा सबसे पहले यमुनोत्री से शुरू होती है, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं।

    2. दो धाम यात्रा का भी विकल्प

      लाखों श्रद्धालु समय की कमी के चलते केवल केदारनाथ और बद्रीनाथ की 'दो धाम यात्रा' भी करते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि पंजीकरण शुल्क लागू होने से यात्रा का डेटा सटीक रहे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन और ठहरने की व्यवस्था को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सके।

      "अनावश्यक पंजीकरण के कारण वास्तविक यात्रियों को स्लॉट नहीं मिल पाते थे। नाममात्र का शुल्क रखने से व्यवस्था में गंभीरता आएगी और प्रशासन के पास वास्तविक यात्रियों का डेटा होगा।"विनय शंकर पांडे, कमिश्नर गढ़वाल

      सीजन: यात्रा सामान्यतः अप्रैल-मई में कपाट खुलने के साथ शुरू होती है और अक्टूबर-नवंबर में शीतकाल के दौरान कपाट बंद होने तक चलती है।

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