रुद्रप्रयाग के बीरों देवल में मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री, सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दिया संदेश

Published: 20 Feb 2026, 03:29 PM   |   Updated: 20 Feb 2026, 03:33 PM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

देवभूमि उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में स्थित रुद्रप्रयाग जनपद का बीरों देवल गांव शुक्रवार को आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा। अवसर था मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा का, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं शामिल हुए।

मां चंडिका मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मुख्यमंत्री ने पूर्ण विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। आस्था और श्रद्धा से भरे इस वातावरण में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति और हृदय में उत्साह स्पष्ट झलक रहा था।

20 वर्षों बाद लौटी दिवारा यात्रा, सांस्कृतिक चेतना का संगम

20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही यह दिवारा यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन गई है। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल को धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगम की संज्ञा देते हुए कहा कि किसी भी देवस्थान पर जाना ईश्वरीय आह्वान और आशीर्वाद का संकेत होता है।

21 नवंबर 2025 से प्रारंभ हुई यह यात्रा लगभग 26 गांवों के भ्रमण के बाद बीरों देवल पहुंची है। गांव-गांव में श्रद्धालुओं ने मां चंडिका का स्वागत कर अपनी आस्था अर्पित की। 15 फरवरी से यहां 9 दिवसीय महायज्ञ का आयोजन जारी है। 22 फरवरी 2026 को विशाल जलयात्रा और 24 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ महावन्याथ यात्रा का समापन होगा।

मंदिर पुनर्निर्माण और नई तहसील भवन की घोषणा

मुख्यमंत्री ने मां चंडिका मंदिर समूह के पुनर्निर्माण को पुरातत्व विभाग के माध्यम से कराए जाने की घोषणा की। साथ ही तहसील बसुकेदार में नवीन तहसील भवन निर्माण का भी ऐलान किया। यह घोषणा स्थानीय लोगों के लिए विकास और आस्था—दोनों का संदेश लेकर आई।

‘दिव्य एवं भव्य केदार’ का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर में हुए व्यापक पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज ‘दिव्य एवं भव्य केदार’ का स्वरूप पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नयन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सांस्कृतिक अस्मिता और कड़े कानून

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-निरोधक प्रावधानों और भूमि अतिक्रमण हटाने जैसे सख्त कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्यभर में 12 हजार से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है और सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।

जनसहभागिता बनी पहचान

आयोजन में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। विभिन्न विभागों ने विकास योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाकर आमजन को राज्य और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

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