सीएम धामी ने संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में भाग लिया, गार्गी बालिका छात्रवृत्ति समेत कई छात्रवृत्तियां प्रदान कीं

Published: 22 Feb 2026, 04:47 PM   |   Updated: 22 Feb 2026, 04:47 PM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति सहित कई छात्रवृत्तियां विद्यार्थियों को प्रदान कीं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केंद्र और ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ किया। इसके साथ ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड केवल अपने ऊँचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए ही नहीं बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत के लिए भी प्रसिद्ध है। वेदों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र जैसी विद्या की जड़ें संस्कृत में ही निहित हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना भी है।

सीएम ने पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी का उदाहरण देते हुए इसकी वैज्ञानिक व्याकरण प्रणाली और विश्व स्तर पर इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने पर बल दिया गया है। ग्रंथों को ऑनलाइन उपलब्ध कराना और एआई के माध्यम से उन्हें नए स्वरूप में प्रस्तुत करना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

उत्तराखंड में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है। पहली बार राज्य में गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत भी की गई है।

सीएम ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, ज्योतिष सम्मेलन, वेद सम्मेलन, संस्कृत कवि सम्मेलन, शिक्षक कौशल विकास कार्यशालाएँ और छात्र प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। सरकारी सहायता, शोध सहयोग और रोजगार के अवसरों के माध्यम से संस्कृत को युवाओं में लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए गए हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं का विस्तार किया गया और प्रत्येक जनपद में संस्कृत ग्राम बनाए गए।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा श्री दीपक कुमार, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय और निदेशक संस्कृत शिक्षा श्रीमती कंचन देवराड़ी उपस्थित थे।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान और उत्तराखंड की पहचान है, जिसे सरकार और समाज मिलकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं।

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