Published:
22 Feb 2026, 04:44 PM
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Updated:
22 Feb 2026, 04:45 PM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
देहरादून। बालावाला का मैदान रविवार को आस्था, उत्साह और एकजुटता के स्वर से गूंज उठा, जब यहां विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग करते हुए इसे “हिंदू समाज की चेतना, एकता और आत्मगौरव का महापर्व” बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है जो आज समाज को संगठित और आत्मविश्वासी बना रही है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज आज अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्राचीन वैभव को पुनर्स्थापित करने के लिए समर्पित भाव से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में देशभर में इस प्रकार के विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन से जुड़े होना उनके लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने संघ के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा, कृषि, ग्राम विकास, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान, सेवा कार्य, कला और विज्ञान—ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ भाव से कार्य न किया हो।
उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है—भाषा, संस्कृति, जाति और क्षेत्र की भिन्नताओं के बावजूद राष्ट्रीय एकात्मता की भावना ही हमें जोड़ती है। “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” का भाव इसी समन्वय का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषाएं, परंपराएं और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मूल मानवीय मूल्य एक ही हैं। इसी व्यापक भावना का स्वरूप हिंदुत्व है, जो विविधताओं में एकता का संदेश देता है।
राज्य सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और “ऑपरेशन कालनेमी” जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, मदरसा बोर्ड समाप्त कर समान शिक्षा व्यवस्था की दिशा में पहल करने तथा “हिंदू स्टडी सेंटर” की स्थापना जैसे प्रयासों का भी जिक्र किया।
कार्यक्रम में विधायक बृज भूषण गैरोला, पार्षद प्रशांत खरोला, ब्रह्मचारी केशर स्वरूप, ललित बुड़ाकोटी, सुभाष बड़थ्वाल, गोपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
बालावाला में आयोजित यह सम्मेलन लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा, जहां सांस्कृतिक अस्मिता और संगठनात्मक शक्ति का सामूहिक प्रदर्शन देखने को मिला।
