देहरादून में भू-माफिया पर डीएम का 'हंटर': प्रतिबंधित जमीन की फर्जी रजिस्ट्री पर मुकदमा दर्ज, रजिस्ट्रार दफ्तर में भी मचेगा हड़कंप

Published: 24 Feb 2026, 12:11 PM   |   Updated: 25 Feb 2026, 05:30 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

राजधानी देहरादून में न्यायालय की रोक के बावजूद प्रतिबंधित जमीनों को कूट रचित (फर्जी) दस्तावेजों के जरिए बेचने का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस गंभीर धोखाधड़ी का संज्ञान लेते हुए भू-माफिया और बिल्डर्स पर सीधा प्रहार किया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर शहर कोतवाली में क्रेता-विक्रेता के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।

न्यायालय के आदेशों की उड़ी धज्जियां

जांच में सामने आया कि मौजा आमवाला तरला स्थित खसरा संख्या 94ख, 134, 135 एवं 136 की भूमि, जो स्पष्ट रूप से न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित श्रेणी में है, उसे जानबूझकर वास्तविक स्थिति छिपाकर पंजीकृत कराया गया। विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 के जरिए करोड़ों की इस भूमि का सौदा किया गया। यह जमीन पीएसीएल (PACL) और कथित रूप से गोल्डन फॉरेस्ट की परिसंपत्तियों से जुड़ी बताई जा रही है।

डीएम का सख्त रुख: "बख्शे नहीं जाएंगे जालसाज"

जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले में दोहरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं:

  • दाखिल-खारिज निरस्त: यदि इन फर्जी विलेखों के आधार पर दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया हुई है, तो उसे तत्काल रद्द किया जाएगा।

  • रजिस्ट्रार कार्यालय पर नजर: सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका संदेह के घेरे में है। जिलाधिकारी ने संकेत दिए हैं कि ऋषिकेश की तर्ज पर देहरादून रजिस्ट्रार दफ्तर का भी वृहद निरीक्षण और 'ऑडिट' किया जाएगा।

कूटरचित दस्तावेजों का खेल

प्राथमिक जांच के अनुसार, जालसाजों ने प्रतिबंधित भूमि को सामान्य भूमि दर्शाने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की। रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 की धारा 83 के तहत प्राथमिकी दर्ज करते हुए पुलिस अब इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है।

"न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त एक गंभीर अपराध है। इस मामले में संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका की भी सूक्ष्म जांच की जा रही है। राजस्व और पंजीकरण विभाग के जो भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें संलिप्त पाए जाएंगे, उन पर कठोर कार्रवाई होगी।" — सविन बंसल, जिलाधिकारी, देहरादून 

बिल्डर्स और भू-माफिया में खौफ

डीएम के इस कड़े रुख के बाद शहर के प्रॉपर्टी मार्केट में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन अब जिले की अन्य प्रतिबंधित श्रेणियों की जमीनों की रजिस्ट्री की भी जांच कराने की तैयारी में है। विशेष रूप से पीएसीएल और गोल्डन फॉरेस्ट जैसी विवादित संपत्तियों पर प्रशासन की पैनी नजर है।

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