Published:
11 Feb 2026, 11:53 AM
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Updated:
11 Feb 2026, 11:55 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में श्रमिकों, कर्मचारियों, सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग से जुड़े ऐसे निर्णय लिए गए, जिनका सीधा असर हजारों लोगों पर पड़ेगा।
कैबिनेट ने कोविड काल में लाए गए राज्य के पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020 को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस प्रावधान के तहत उद्योगों को केवल सरप्लस की स्थिति में ही बोनस देने की व्यवस्था थी।
चूंकि केंद्र का पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 पहले से प्रभावी है और राज्य का प्रस्ताव राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त नहीं कर सका था, इसलिए इसे वापस लेते हुए केंद्रीय कानून को ही लागू रखने का फैसला किया गया है। इससे कर्मचारियों को बोनस मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
बैठक में ईएसआई डॉक्टरों की नियमावली और उत्तराखंड एम्प्लॉयी स्टेट सर्विस स्कीम 2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत कुल 94 पद सृजित किए जाएंगे।
इनमें—
76 मेडिकल ऑफिसर
11 असिस्टेंट डायरेक्टर
लेवल-12 के 6 पद
लेवल-13 का एक एडिशनल डायरेक्टर
पहले मेडिकल ऑफिसरों के प्रमोशन के पद स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं थे, जिन्हें अब व्यवस्थित किया गया है। इससे चिकित्सा सेवाओं में संरचनात्मक सुधार की उम्मीद है।
गृह विभाग से जुड़े प्रस्ताव में वर्ष 2022 में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया। मुख्यालय स्तर पर 22 नए पद सृजित किए जाएंगे, जिनमें एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सहित अन्य पद शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इससे नशा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी।
कैबिनेट ने 2024 में पारित उत्तराखंड कारागार एक्ट में संशोधन को भी मंजूरी दी। आदतन अपराधियों की परिभाषा को पूर्व के कानून के अनुरूप लागू किया जाएगा, जिससे कानून व्यवस्था और जेल प्रबंधन को और स्पष्ट दिशा मिल सके।
वन विभाग में कार्यरत 893 दैनिक श्रमिकों में से शेष 589 श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान देने की मंजूरी दी गई है। इस फैसले से लंबे समय से नियमित वेतनमान की प्रतीक्षा कर रहे श्रमिकों को राहत मिलेगी।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के साथ राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना को भी जारी रखने का निर्णय लिया है। तय किया गया है कि जब तक केंद्र की योजना 2025-26 तक प्रभावी रहेगी, तब तक राज्य की योजना भी समानांतर रूप से संचालित की जाएगी।
