रामायण की 'मंथरा' की रुला देने वाली दास्तां: एक थप्पड़ ने छीनी आंखों की रोशनी, अधूरा रह गया हीरोइन बनने का सपना

Published: 24 Feb 2026, 08:26 AM   |   Updated: 24 Feb 2026, 08:27 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

पर्दे की सबसे 'क्रूर' सास, जिसके पीछे छिपा था एक गहरा दर्द: जब एक हादसे ने बदल दिया अंबा का नसीब

 भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जिन्हें भुला पाना नामुमकिन है। 'रामायण' की 'मंथरा' यानी ललिता पवार एक ऐसा ही नाम थीं। पर्दे पर अपनी तिरछी आंख और कड़क आवाज से खौफ पैदा करने वाली इस अभिनेत्री के पीछे एक ऐसी त्रासदी छिपी थी, जिसने उनके खूबसूरत चेहरे और सुनहरे सपनों को हमेशा के लिए बदल दिया।

9 साल की उम्र में रखा कदम, बनना चाहती थीं 'हुस्न की मल्लिका'

1916 में नासिक के एक रेशम व्यापारी के घर जन्मीं अंबा लक्ष्मण राव सगुन (ललिता पवार) बचपन से ही अभिनय की शौकीन थीं। मात्र 9 साल की उम्र में उन्होंने मूक फिल्म 'राजा हरिशचंद्र' (1928) से अपने करियर की शुरुआत की। उनकी प्रतिभा ऐसी थी कि हर कोई उन्हें भविष्य की बड़ी हीरोइन मान रहा था। पिता का साथ मिला और ललिता ने बतौर लीड एक्ट्रेस कई फिल्में साइन कीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

वो एक थप्पड़ और थम गई जिंदगी की रफ्तार

साल 1942 में फिल्म 'जंग-ए-आजादी' की शूटिंग चल रही थी। एक सीन में को-एक्टर को ललिता पवार को थप्पड़ मारना था। सीन को हकीकत का रंग देने के चक्कर में एक्टर ने इतनी जोर का थप्पड़ मारा कि ललिता फर्श पर जा गिरीं।

  • असर: उनके कान से खून बहने लगा और आंख की नस फट गई।

  • त्रासदी: गलत इलाज के कारण उनके शरीर के एक हिस्से को लकवा मार गया और उनकी एक आंख हमेशा के लिए छोटी हो गई।

हार नहीं मानी: विलेन बनकर ढाया कहर

एक खूबसूरत हीरोइन के लिए चेहरे का बिगड़ना करियर का अंत माना जाता है, लेकिन ललिता पवार ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया। हीरोइन बनने का सपना टूटा, तो वह 'अत्याचारी सास' और 'खलनायिका' के किरदारों में उतर गईं। रामानंद सागर की 'रामायण' में उन्होंने 'मंथरा' का किरदार इतनी शिद्दत से निभाया कि लोग असल जिंदगी में भी उन्हें उसी नफरत भरी नजर से देखने लगे। यही उनके अभिनय की सबसे बड़ी जीत थी।

700 फिल्में और तन्हाई में अंत

अपने लंबे करियर में 700 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली इस महान अभिनेत्री का अंत बेहद दुखद रहा। हिंदी, मराठी और गुजराती सिनेमा पर राज करने वाली ललिता पवार ने साल 1998 में मुंह के कैंसर के कारण इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज भी जब मंथरा का जिक्र आता है, तो ललिता पवार का वो चेहरा आंखों के सामने घूम जाता है, जिसने दर्द को ही अपनी पहचान बना लिया।

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