Published:
03 Jul 2026, 10:36 AM
Category:
राज्य
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By: Admin
सोमेश्वर। मानसून आने के साथ ही सोमेश्वर की बोरारो घाटी के खेत फिर से जीवंत हो उठे हैं। पहाड़ की लोक संस्कृति की पहचान हुड़किया बोल की मधुर धुनों और हुड़के की थाप के बीच धान की रोपाई पूरे उत्साह से चल रही है।
बरसात जहां किसानों के लिए समृद्धि का संदेश लेकर आई है, वहीं खेतों में गूंजते लोकगीत और सामूहिक श्रम ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजे हुए हैं। प्रदेश का धान का कटोरा कही जाने वाली बोरारो घाटी में इन दिनों महिलाएं सुबह से शाम तक खेतों में धान के पौधे रोपने में जुटी हैं। पहले नर्सरी से पौधे निकालने और फिर पानी से लबालब खेतों में रोपाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है। हुड़किया बोल की लय पर कदम मिलाकर काम करने से कठिन श्रम भी उत्सव का रूप ले लेता है।
समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। कभी बैलों और लकड़ी की दनाई से खेत तैयार किए जाते थे, लेकिन अब अधिकांश किसान छोटे ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि उपकरणों का सहारा ले रहे हैं। इसके बावजूद रोपाई के दौरान लोक परंपराएं आज भी पूरी शिद्दत से निभाई जा रही हैं।
किसान महिलाओं का कहना है कि धान की खेती में दिन-रात कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। अच्छी बारिश होने पर ही पूरे वर्ष की आजीविका और खुशहाली की उम्मीद बंधती है। यही कारण है कि मानसून उनके लिए केवल मौसम नहीं, बल्कि समृद्धि और नई उम्मीदों का संदेश लेकर आता है।
