शौक की कोई कीमत नहीं: देहरादून में '0001' नंबर के लिए खर्च किए 9.26 लाख रुपये; पद्मनाभ हेल्थकेयर ने जीती नीलामी की जंग

Published: 26 Feb 2026, 07:21 AM   |   Updated: 26 Feb 2026, 09:08 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

देहरादून। राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों की पहचान अब और भी 'खास' होने वाली है। आरटीओ कार्यालय में हाल ही में संपन्न हुई फैंसी नंबरों की नीलामी ने साबित कर दिया कि खास पहचान के लिए लोग अपनी जेब ढीली करने से पीछे नहीं हटते। इस बार की नीलामी में सबसे ज्यादा चमक UK07 HK 0001 नंबर की रही, जिसे हासिल करने के लिए बोली लगाने वालों में होड़ मच गई।

9 लाख 26 हजार में बिका 'एक' नंबर आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने बताया कि सीरीज़ के सबसे प्रतिष्ठित नंबर '0001' को पद्मनाभ हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड ने 9 लाख 26 हजार रुपये की भारी-भरकम बोली लगाकर अपने नाम किया। यह इस ऑक्शन का सबसे महंगा और आकर्षक नंबर रहा। अपनी पसंदीदा संख्या को अपनी गाड़ी की प्लेट पर सजाने के लिए कंपनी ने लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए।

इन नंबरों पर भी बरसे पैसे सिर्फ '0001 ही नहीं, अन्य नंबरों के लिए भी अमीरों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखा गया:

  • UK07 HK 0006: अमित सचदेवा ने 3 लाख 65 हजार रुपये खर्च कर इसे हासिल किया।

  • UK07 HK 0005: शमशेर सिंह ने 2 लाख 12 हजार रुपये में अपनी पसंद का नंबर पाया।

दिखा रूतबा और पारदर्शी प्रक्रिया वाहन मालिकों के बीच वीआईपी नंबरों को लेकर बढ़ती यह होड़ उनके रूतबे और विशेष पहचान की चाहत को दर्शाती है। आरटीओ प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरी नीलामी प्रक्रिया ऑनलाइन और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में आने वाली नई सीरीज़ में भी इसी तरह की ई-नीलामी जारी रहेगी, जिससे राजस्व में भी भारी इजाफा हो रहा है।

"फैंसी नंबरों के प्रति लोगों का उत्साह हर बार नया रिकॉर्ड बना रहा है। पारदर्शी व्यवस्था के चलते लोग अपनी पसंद के नंबर के लिए खुलकर बोली लगा रहे हैं।" — संदीप सैनी, आरटीओ प्रशासन

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