बनभूलपुरा पर 'सुप्रीम' फैसला: 'भूमि राज्य की, अधिकार नहीं', कोर्ट ने कहा- पीएम आवास योजना से होगा पुनर्वास, 19 मार्च से लगेंगे शिविर

Published: 24 Feb 2026, 11:18 AM   |   Updated: 24 Feb 2026, 11:19 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

लंबे समय से विवादों में रहे बनभूलपुरा रेलवे भूमि प्रकरण में आज अदालत ने एक दूरगामी और व्यावहारिक आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह गतिरोध अब अनिश्चितकाल तक नहीं खिंच सकता। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि विवादित भूमि राज्य की है और याचिकाकर्ताओं को वहां बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, हालांकि सरकार का नैतिक दायित्व है कि वह पात्र गरीबों का पुनर्वास सुनिश्चित करे।

पीएम आवास योजना बनेगी 'संजीवनी'

अदालत ने माना कि प्रभावित होने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ही सबसे बेहतर विकल्प है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि:

  • 19 मार्च से विशेष शिविर: प्रभावित क्षेत्र में ऑन-साइट कैंप लगाए जाएं ताकि बुजुर्गों और महिलाओं को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

  • प्रशासनिक सहयोग: जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी खुद मौके पर आवेदन पत्र उपलब्ध कराएंगे।

  • काउंसलिंग की जरूरत: लोगों के मन में घर छिनने का डर और योजनाओं को लेकर भ्रम है, जिसे दूर करने के लिए विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता उनकी काउंसलिंग करेंगे।

न्यायालय की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

"भूमि राज्य की संपत्ति है और उसका उपयोग कैसे करना है, यह राज्य का विशेषाधिकार है। यह मामला अब कानूनी लड़ाई से ज्यादा मानवीय सहायता का है। सरकार और प्रभावित पक्ष 31 मार्च से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुंचें।"

छावनी में तब्दील रहा बनभूलपुरा, ड्रोन से निगरानी

अदालत में हो रही इस अहम सुनवाई के मद्देनजर हल्द्वानी प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। खुद SSP डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बनभूलपुरा की गलियों में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उपद्रवियों और अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया गया। शहर में शांति बनी रही, लेकिन अदालत के फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

अगली तारीख: 19 मार्च

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। तब तक जिला प्रशासन को शिविरों के माध्यम से आए आवेदनों और पुनर्वास की दिशा में हुई प्रगति की रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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