Published:
13 Mar 2026, 12:34 PM
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Updated:
13 Mar 2026, 12:34 PM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
कुमाऊं के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सुशीला तिवारी अस्पताल (STH) और राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में इन दिनों गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से हड़कंप मच गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अस्पताल की सार्वजनिक कैंटीन बंद करनी पड़ी है और मेडिकल कॉलेज की मेस में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है।
इस संकट का असर न केवल अस्पताल में भर्ती मरीजों पर पड़ रहा है बल्कि उनके तीमारदारों और मेडिकल कॉलेज के छात्रों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार STH में रोजाना करीब 500 मरीजों के लिए नाश्ता और भोजन तैयार किया जाता है।
मेस संचालक देवकी नंदन ने बताया कि अस्पताल में हर महीने करीब 90 गैस सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन इस समय पूरा स्टॉक खत्म हो चुका है। गैस की आपूर्ति न होने के कारण अस्पताल की सार्वजनिक कैंटीन भी बंद करनी पड़ी है।
गैस संकट का असर मेडिकल कॉलेज की मेस पर भी साफ दिखाई दे रहा है। यहां पांच मेस में करीब 500 से अधिक छात्र-छात्राएं भोजन करते हैं।
मेस प्रबंधन के अनुसार गैस न होने की वजह से चार क्विंटल लकड़ी खरीदकर चूल्हा जलाना पड़ रहा है, ताकि छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा सके।
यह समस्या केवल STH तक सीमित नहीं है। हल्द्वानी के महिला अस्पताल और बेस अस्पताल में भी गैस सिलेंडरों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है।
महिला अस्पताल की CMS डॉ. ऊषा जंगपांगी
बेस अस्पताल के PMS डॉ. केएस दताल
दोनों ने पुष्टि की है कि उनके अस्पतालों में भी गैस का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। यदि जल्द आपूर्ति नहीं हुई तो मरीजों के लिए भोजन व्यवस्था करना मुश्किल हो सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीएस तितियाल ने जिलाधिकारी और खाद्य आपूर्ति विभाग को पत्र भेजकर तत्काल समाधान की मांग की है।
इसके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट को भी फोन के माध्यम से पूरी स्थिति से अवगत कराया गया है।
अस्पताल प्रशासन ने कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) से तत्काल कुकिंग गैस उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि मरीजों और छात्रों को भोजन की समस्या का सामना न करना पड़े।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस संकट से निपटने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अगर जल्द गैस की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
