Published:
10 Mar 2026, 11:44 AM
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Updated:
10 Mar 2026, 11:46 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
तकनीक ने दुनिया को जितनी सुविधाएं दी हैं, उतने ही खतरनाक रास्ते भी खोल दिए हैं। हाल ही में आई Independent Anti-Slavery Commissioner (IASC) की रिपोर्ट ने इंटरनेट की एक डरावनी सच्चाई उजागर की है—ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं और मासूम बच्चियों का सौदा ऐसे किया जा रहा है जैसे वे कोई सामान्य उत्पाद हों।
‘पिम्पिंग वेबसाइट्स’ बन गईं अपराधियों की कमाई का जरिया
जांच का नेतृत्व करने वाली Eleanor Lyons के अनुसार, ये तथाकथित ‘पिम्पिंग वेबसाइट्स’ आधुनिक गुलामी का बड़ा नेटवर्क बन चुकी हैं। जांच में सामने आया कि 12 प्रमुख वेबसाइट्स पर मौजूद करीब 63,000 विज्ञापनों में से लगभग 60% सीधे तौर पर मानव तस्करी और यौन शोषण से जुड़े थे।
सिर्फ एक महीने में इन साइट्स पर 4 करोड़ से अधिक लोग पहुंचे—यह आंकड़ा बताता है कि यह अवैध कारोबार कितनी तेजी से फैल रहा है।
पीड़िताओं की दर्दनाक कहानी
रिपोर्ट में सामने आई पीड़िताओं की कहानियां बेहद दिल दहला देने वाली हैं। एक महिला ने बताया कि उसने अपने शरीर पर टैटू सिर्फ इसलिए बनवाया ताकि अगर उसकी हत्या हो जाए तो कम से कम उसकी पहचान हो सके। कई महिलाओं को धमकियों, हिंसा और जबरन शोषण के जरिए इस नेटवर्क में धकेला जाता है।
अक्सर अपराधी खुद महिलाओं के नाम से ग्राहकों से चैट करते हैं और पूरा मुनाफा बिचौलिए ले जाते हैं, जबकि पीड़िताएं बेघर और मानसिक आघात के साथ जीने को मजबूर रहती हैं।
सरकारों का सख्त कदम
रिपोर्ट के बाद कई देशों में सरकारों ने कड़ा रुख अपनाया है। नए प्रस्तावित कानूनों के तहत अदालतों को ऐसी वेबसाइट्स को तुरंत बंद करने का अधिकार दिया जा सकता है। साथ ही टेक कंपनियों को आपत्तिजनक कंटेंट 48 घंटे के भीतर हटाने और Age Verification अनिवार्य करने की मांग तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर दिखने वाले ‘एस्कॉर्ट सर्विस’ जैसे संदिग्ध विज्ञापनों के पीछे अक्सर एक बड़ा संगठित अपराध छिपा होता है, इसलिए ऑनलाइन सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
