केदारनाथ धाम से जुड़ी आस्था के प्रतीक “रूप छड़” को महाराष्ट्र के नांदेड़ ले जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर अब सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
देहरादून और केदारनाथ में इस मामले को लेकर मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति ने भी कड़ा रुख अपनाया है। समिति के संयोजक लूशुन टोडरिया ने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली रूप छड़ को उत्तराखंड से बाहर एक निजी कार्यक्रम में ले जाना गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ है, बल्कि देवभूमि की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं पर भी कुठाराघात है।
पर्यटन मंत्री ने दिए जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद संघर्ष समिति ने बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) को सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा किया है।
बीकेटीसी की भूमिका पर सवाल
संयोजक लूशुन टोडरिया का कहना है कि वर्ष 2000 में मंदिर समिति ने परंपराओं को सुरक्षित रखने का हवाला देते हुए रूप छड़ को राज्य से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी थी। ऐसे में अब सवाल उठता है कि आखिर वर्तमान में किस परंपरा के आधार पर इसे महाराष्ट्र के नांदेड़ ले जाने की अनुमति दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के समय में बीकेटीसी लगातार विवादों में घिरती नजर आ रही है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
संघर्ष समिति ने इस मामले की निष्पक्ष और जल्द जांच की मांग करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
लूशुन टोडरिया ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति बीकेटीसी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगी।
