Published:
18 Feb 2026, 08:17 AM
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Updated:
18 Feb 2026, 08:19 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
किच्छा। आंगन में ढोल की थाप थी, मेहमानों की आवाजाही और हरियाणा से आई बारात के स्वागत की तैयारियां जोरों पर थीं। ग्राम अंजनिया के एक घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन उन खुशियों के नीचे समाज की वह पुरानी 'खामोशी' दबी थी, जो अक्सर बाल विवाह जैसे अपराध को दबा देती है। लेकिन इस बार यह चुप्पी नहीं चली।
जब मंडप में पहुंच गए 'कानून के रखवाले' आई एस डी संस्था को 'बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' के तहत गुप्त सूचना मिली कि एक नाबालिग को सात फेरों के बंधन में बांधा जा रहा है। सूचना मिलते ही परियोजना निदेशक बिंदुवासिनी के नेतृत्व में चाइल्ड लाइन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। अचानक सरकारी अमले को देख शादी के घर में अफरा-तफरी मच गई।
कागजों ने खोली हकीकत: सिर्फ 15 साल की निकली दुल्हन परिजनों ने शुरुआत में टालमटोल की, लेकिन जब जूनियर हाई स्कूल के दस्तावेज खंगाले गए तो सच्चाई सामने आ गई। बालिका की उम्र 15 वर्ष 11 माह निकली। यानी कानून की नजर में बालिग होने में अभी पूरा एक महीना बाकी था। समाज शायद इसे 'बस एक ही तो महीना कम है' कहकर टाल देता, लेकिन कानून महीनों से नहीं, मुकम्मल उम्र से चलता है।
वन स्टॉप सेंटर भेजी गई बालिका टीम ने तत्काल प्रभाव से शादी रुकवा दी। बालिका को सुरक्षा के लिहाज से 'वन स्टॉप सेंटर' में दाखिल कराया गया है। दूल्हा और दोनों पक्षों के परिजनों को अब बाल कल्याण समिति के सामने पेश होना होगा। संस्था के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि 'जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलायंस' के सहयोग से हमारी टीम गांव-गांव नजर रख रही है।
बैंड और कैटरर को भी हिदायत: सिर्फ दावत नहीं, जिम्मेदारी भी समझें परियोजना निदेशक बिंदुवासिनी ने न केवल परिजनों को फटकार लगाई, बल्कि मौके पर मौजूद बैंड वालों, कैटरर और स्थानीय प्रधान अमन कश्यप को भी दो-टूक कहा। उन्होंने नसीहत दी कि वैवाहिक कार्यक्रम बुक करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि दूल्हा-दुल्हन बालिग हैं। यह सिर्फ सजावट का काम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
यह खबर सिर्फ एक शादी रुकने की नहीं है, यह उस सोच पर चोट है जो परंपराओं को कानून से ऊपर मानती है। किच्छा में आज एक शादी रुकी है, तो यकीन मानिए एक मासूम की जिंदगी बची है।
