अल्मोड़ा की सांस्कृतिक धरोहरों पर कमिश्नर की पैनी नजर: बोले दीपक रावत- 'वैज्ञानिक तरीके से सहेजें इतिहास, पर्यटन केंद्र के रूप में संवरेगा मल्ला महल'।

Published: 18 Feb 2026, 07:31 AM   |   Updated: 18 Feb 2026, 07:32 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

अल्मोड़ा। अपनी कार्यशैली के लिए मशहूर कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत इन दिनों अल्मोड़ा के भ्रमण पर हैं। दौरे के दूसरे दिन उन्होंने जिले की उन धड़कनों को महसूस किया जो हमारे गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे हुए हैं। कमिश्नर ने राजकीय संग्रहालय और ऐतिहासिक मल्ला महल का सघन निरीक्षण कर अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारी पुरातन वस्तुएं केवल शो-पीस नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक हैं।

संग्रहालय में पुराने सिक्कों और पांडुलिपियों पर टिका ध्यान राजकीय संग्रहालय पहुंचे आयुक्त ने वहां रखे ताम्रपत्रों, प्राचीन मूर्तियों और दुर्लभ सिक्कों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इन धरोहरों का वैज्ञानिक संरक्षण अनिवार्य है। सिक्कों के इतिहास पर चर्चा करते हुए उन्होंने निर्देशित किया कि इन्हें व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत (Classify) किया जाए ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक और शोधार्थी इनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को आसानी से समझ सकें।

पंत जी के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प निरीक्षण के दौरान उन्होंने भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी से संबंधित अभिलेखों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि युवा अपने इतिहास पर गर्व कर सकें।

पर्यटन हब बनेगा ऐतिहासिक 'मल्ला महल' ऐतिहासिक मल्ला महल के निरीक्षण के दौरान आयुक्त रावत ने इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्ता को सराहा। उन्होंने कहा, "मल्ला महल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि हम अपनी विरासत को पर्यटन से जोड़ दें, तो इससे न केवल संस्कृति का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय लोगों की आर्थिकी भी मजबूत होगी।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए एक 'इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान' तैयार किया जाए 

मौके पर रही अधिकारियों की मौजूदगी निरीक्षण के दौरान उनके साथ अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, एसडीएम संजय कुमार, संग्रहालय प्रभारी डॉ. सीएस चौहान, पर्यटन उप निदेशक प्रकाश सिंह खत्री और वीथिका सहायक जन्मजेय तिवारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। आयुक्त के इस कड़े रुख और दिशा-निर्देशों के बाद उम्मीद जगी है कि अल्मोड़ा की ऐतिहासिक धरोहरों को अब नया जीवन मिलेगा।

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