लालकुआँ में नशे के सौदागरों के खिलाफ 'युद्ध' का एलान: जनाक्रोश के साथ कोतवाली पहुंचे समाजसेवी, अल्टीमेटम- '7 दिन में सप्लायरों को जेल भेजो, वरना होगा आमरण अनशन'

Published: 19 Feb 2026, 08:00 AM   |   Updated: 19 Feb 2026, 08:02 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

लालकुआँ। लालकुआँ विधानसभा क्षेत्र में नशे के दानव ने युवाओं के भविष्य को निगलना शुरू कर दिया है। स्मैक, चरस और अवैध कच्ची शराब के बढ़ते कारोबार के खिलाफ अब क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतर आई है। बुधवार को क्षेत्रीय जन समस्या निवारण संघर्ष समिति के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने कोतवाली का घेराव कर पुलिस प्रशासन को सीधी चुनौती दी।

7 दिन का अल्टीमेटम: अब आर-पार की लड़ाई

संघर्ष समिति ने कोतवाल को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट कर दिया है कि यदि सात दिनों के भीतर नशे के मुख्य सरगनाओं पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कोतवाली परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन शुरू करेंगे। समिति का आरोप है कि बिंदुखत्ता, हल्दुचौड़, मोटाहल्दू और गौला गेट जैसे क्षेत्रों में नशे का जाल संगठित रूप से फैलाया जा रहा है।

"सिर्फ छोटी मछली नहीं, मगरमच्छों पर हो वार"

संघर्ष समिति के संयोजक पियूष जोशी ने कहा कि पुलिस अक्सर छोटे विक्रेताओं को पकड़कर खानापूर्ति करती है, जबकि मुख्य सप्लायर और वित्तपोषक (Financiers) खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने मांग की कि NDPS एक्ट के तहत आपूर्ति श्रृंखला के मुख्य संचालकों पर कठोर प्रहार किया जाए।

पुलिसिया तंत्र पर भी उठे सवाल: बीट अधिकारियों के तबादले की मांग

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए। छात्र महासंघ अध्यक्ष आशिष बड़वाल ने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी वर्षों से एक ही बीट पर जमे हुए हैं, जिससे पारदर्शिता संदिग्ध हो जाती है। मांग की गई है कि:

  • लंबे समय से तैनात बीट प्रभारियों और कांस्टेबलों का तत्काल स्थानांतरण किया जाए।

  • संवेदनशील क्षेत्रों में नई और निष्पक्ष टीम तैनात हो।

  • बीट व्यवस्था की मासिक समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

शराब की दुकानों पर भी नजर, जनभावना का सम्मान हो

व्यापार मंडल अध्यक्ष (मोटाहल्दू) संदीप पांडे ने मोती नगर और मोटाहल्दू क्षेत्र की शराब की दुकानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने साफ कहा कि जिस दुकान को युवाओं के विरोध के बाद बंद कराया गया था, उसे दोबारा किसी भी सूरत में खुलने नहीं दिया जाएगा।

प्रमुख मांगें जिन पर टिका है आंदोलन:

  1. मुख्य सप्लायरों की गिरफ्तारी: केवल पुड़िया बेचने वाले नहीं, थोक सप्लायर पकड़े जाएं।

  2. सादी वर्दी में निगरानी: संवेदनशील इलाकों और शिक्षण संस्थानों के पास सादी वर्दी में पुलिस तैनात हो।

  3. गोपनीयता और सुरक्षा: सूचना देने वाले नागरिकों की पहचान गुप्त रखने की फुलप्रूफ व्यवस्था।

  4. जागरूकता अभियान: स्कूलों-कॉलेजों में पुलिस के साथ मिलकर नशा विरोधी कैंप।

प्रदर्शन में ये रहे मौजूद

इस दौरान सचिन फुलारा, देवेंद्र तिवारी, हरेंद्र असगोला, कमल जोशी मुनि, हेमवती नंदन दुर्गापाल, विशाल झा, अधिवक्ता भानु कबड़वाल सहित दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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