Published:
12 Dec 2025, 10:51 AM
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Updated:
12 Dec 2025, 10:51 AM
Category:
राज्य
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By: Admin
देहरादून: गुरुवार को सचिवालय में हुई जेल विकास बोर्डकी बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जेलों को आधुनिक, उत्पादक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को जेल विकास का अपना अलग और प्रभावी मॉडल विकसित करना चाहिए, जो सुरक्षा के साथ-साथ उत्पादन और कौशल विकास को भी मजबूती दे।
‘एक जेल-एक प्रोडक्ट’ मॉडल की शुरुआत
सीएम धामी ने सभी जेलों में ‘एक जेल-एक प्रोडक्ट’ अवधारणा लागू करने के निर्देश दिए। इसके तहत हर जेल में एक विशिष्ट उत्पाद तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय पहचान और बाजार में ब्रांड वैल्यू बने। साथ ही, जेलों में बने उत्पादों का अधिकतम उपयोग सरकारी कार्यालयों में करने की सलाह दी गई ताकि इकाइयों की आय बढ़े और बंदियों को कौशल आधारित काम का अनुभव मिले।
कौशल विकास और प्रशिक्षण
बंदियों के कौशल विकास के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आईटीआई की सहायता से अलग-अलग ट्रेड के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, जिससे बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भर जीवन में मदद मिले।
नई मशीनरी और सुविधाएँ
केन्द्रीय कारागार सितारगंज, जिला कारागार अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, उपकारागार हल्द्वानी और रुड़की में नई लॉन्ड्री मशीनें स्थापित की जाएंगी। देहरादून और हरिद्वार की जेलों में पहले से लगी मशीनों के अच्छे परिणामों के आधार पर विस्तार किया जा रहा है।
उत्पादन इकाइयों से बढ़ती आय
सितारगंज की खुली जेल में गौशाला से लगभग 10 लाख रुपये और हरिद्वार, अल्मोड़ा, सितारगंज व हल्द्वानी की बेकरी यूनिट्स से लगभग 12 लाख रुपये की आय हुई। इसके अलावा, सरसों तेल इकाई और मशरूम फार्मिंग जैसी नई पहल बंदियों को खेती-आधारित कारोबार और उत्पादन तकनीकों का अनुभव देंगी।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक कारागार अभिनव कुमार, सचिव सी. रविशंकर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
