Published:
10 Feb 2026, 11:45 AM
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Updated:
10 Feb 2026, 11:46 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे की कथित अप्रकाशित किताब के लीक होने का मामला अब राजनीतिक और कानूनी विवाद में बदल गया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि जिस किताब के प्रकाशित न होने का दावा किया जा रहा है, वह सार्वजनिक तौर पर कैसे सामने आई।
इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सेना प्रमुख का खुला समर्थन किया है। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें जनरल नरवणे पर पूरा भरोसा है और उन्हें नहीं लगता कि एक पूर्व थलसेनाध्यक्ष झूठ बोल सकते हैं।
राहुल गांधी ने मीडिया के सामने जनरल नरवणे का 2023 का एक सोशल मीडिया पोस्ट दिखाते हुए कहा कि,
“जनरल नरवणे ने खुद अपनी किताब का लिंक साझा किया था और लोगों से उसे खरीदने की अपील की थी। अब या तो जनरल नरवणे सच बोल रहे हैं या फिर प्रकाशक पेंग्विन इंडिया। मुझे पूर्व सेनाध्यक्ष पर विश्वास है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पेंग्विन इंडिया जहां किताब के प्रकाशित न होने की बात कर रहा है, वहीं वही किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेज़न पर उपलब्ध बताई जा रही है। राहुल गांधी का कहना है कि किताब में लिखी कुछ बातें सरकार और प्रधानमंत्री को असहज कर सकती हैं, इसी कारण यह विवाद खड़ा हुआ है।
प्रकाशक पेंग्विन इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का प्रकाशन रोक दिया गया था और कोई भी प्रति सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई।
प्रकाशक ने चेतावनी दी है कि यदि किताब की कोई प्रति कहीं पाई जाती है, तो उसे तत्काल जब्त किया जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा,
“अगर प्रकाशक कह रहा है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई, तो राहुल गांधी संसद में कौन-सी किताब दिखा रहे हैं?”
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि राहुल गांधी और देश को नुकसान पहुंचाने वाले कथित ‘सोरोस तत्वों’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। दुबे ने यह भी कहा कि विपक्ष की महिला सांसदों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि—
क्या किताब वास्तव में प्रकाशित हुई थी
अगर नहीं, तो उसकी प्रति सार्वजनिक कैसे हुई
और लीक के पीछे जिम्मेदार कौन है
यह मामला अब केवल एक किताब तक सीमित न रहकर राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों से जुड़ गया है।
