Published:
25 Feb 2026, 11:10 AM
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Updated:
25 Feb 2026, 11:11 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
सरोवर नगरी के एक होटल में हुए चर्चित दीक्षा हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायाधीश प्रशांत जोशी ने गाजियाबाद निवासी अभियुक्त ऋषभ उर्फ ‘इमरान’ को हत्या और धोखाधड़ी का दोषी करार दिया है। अदालत अब 26 फरवरी को उसकी सजा की अवधि पर मुहर लगाएगी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर निवासी श्वेता शर्मा ने मल्लीताल कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। घटना 14 अगस्त की है, जब आरोपी ऋषभ तिवारी उर्फ 'इमरान' अपनी पत्नी दीक्षा, श्वेता और उनके मित्र अलमास के साथ नैनीताल घूमने आया था। उन्होंने मल्लीताल के एक होटल में दो कमरे लिए थे। 16 अगस्त को जब दीक्षा ने फोन नहीं उठाया और इमरान का फोन स्विच ऑफ आया, तो कमरे की जांच करने पर दीक्षा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ।
मुकदमे की पैरवी के दौरान अभियोजन पक्ष ने चौंकाने वाले खुलासे किए। डीजीसी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि:
आरोपी ने अपना असली नाम (इमरान) और धर्म छिपाकर दीक्षा से शादी की थी।
बचाव पक्ष ने खुद को निर्दोष बताने के लिए एक काजी को गवाह के तौर पर पेश किया, जिसने निकाहनामे को सही ठहराने की कोशिश की।
सरकारी अधिवक्ताओं ने जिरह के दौरान निकाहनामे और काजी की दलीलों को फर्जी साबित कर दिया।
अभियोजन पक्ष ने इमरान को सजा दिलाने के लिए पुख्ता सबूत पेश किए:
17 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
CCTV फुटेज (DVR) को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया, जिससे आरोपी की घटनास्थल पर मौजूदगी साबित हुई।
CFSL चंडीगढ़ की रिपोर्ट ने वैज्ञानिक स्तर पर हत्या की पुष्टि की।
हत्या के बाद आरोपी दीक्षा के तमाम कीमती जेवरात और जरूरी कागजात लेकर फरार हो गया था।
न्यायालय ने सभी दलीलों और सबूतों को देखने के बाद इमरान को दोषी मानते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अब सबकी नजरें 26 फरवरी पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि इस जघन्य अपराध के लिए दोषी को उम्रकैद मिलेगी या फांसी।
