Published:
20 Feb 2026, 06:42 AM
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Updated:
20 Feb 2026, 07:09 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
नैनीताल। वर्तमान दौर में सोशल मीडिया पर 'पत्रकार' बनकर सूचनाएं परोसने वालों के लिए नैनीताल हाईकोर्ट ने लक्ष्मण रेखा खींच दी है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि पत्रकारिता कोई ढाल नहीं है जिसके पीछे छिपकर किसी की साख से खिलवाड़ किया जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय पत्रकारों को अब तय आचार संहिता (Code of Ethics) के दायरे में रहकर ही काम करना होगा, अन्यथा उन्हें सलाखों के पीछे जाने से कोई नहीं बचा पाएगा।
यह सख्त टिप्पणी न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने ‘हिमांशु ठाकुर बनाम राज्य सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान की। मामला काशीपुर के कुंडा स्थित एसबीआई (SBI) शाखा से जुड़ा है। बैंक की शाखा प्रबंधक सुमन सिंह ने आरोप लगाया था कि याची (हिमांशु ठाकुर) ने सोशल मीडिया पर एक 'मीडिया बाइट' जारी की, जिससे न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि धूमिल हुई बल्कि बैंक की साख को भी गहरा धक्का लगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि शिकायतकर्ता सुमन सिंह ने इस मामले में 'जबरन वसूली' (Extortion) के तहत केस दर्ज कराया था। आरोप है कि पत्रकारिता की आड़ में दबाव बनाने और छवि खराब करने की कोशिश की गई। कोर्ट ने इस प्रवृत्ति को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए घातक माना और कहा कि तकनीक के विस्तार का मतलब यह कतई नहीं है कि कोई भी व्यक्ति बिना जिम्मेदारी के पत्रकारिता करने लगे।
हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई छह हफ्ते बाद तय की है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब उन डिजिटल पोर्टल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स पर हड़कंप मच गया है जो बिना किसी सत्यापन के खबरें चलाते हैं।
अदालत का संदेश: > पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, अधिकार मात्र नहीं। यदि आप किसी की प्रतिष्ठा पर प्रहार करते हैं, तो आपको यह साबित करना होगा कि वह तथ्यपरक है। बिना आचार संहिता के की जाने वाली 'डिजिटल रिपोर्टिंग' पर अब कानून की पैनी नजर है।
