Published:
28 Feb 2026, 07:31 AM
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Updated:
28 Feb 2026, 07:32 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
लालकुआं: देश भर में एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नागरिकों ने महामहिम राष्ट्रपति को पंजीकृत ज्ञापन भेजकर देश में “एक राष्ट्र–एक शिक्षा” नीति लागू करने की पुरजोर मांग की है। यह ज्ञापन तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली को भेजा गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान बहु-बोर्डीय शिक्षा प्रणाली के कारण विद्यार्थियों के बीच अवसरों की समानता प्रभावित हो रही है। अलग-अलग पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और निजी विद्यालयों की मनमानी फीस संरचना के चलते सामाजिक एवं आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है।
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 एवं 21A का हवाला देते हुए शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
नागरिकों ने ज्ञापन के माध्यम से शिक्षा प्रणाली से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को चिन्हित किया है:
पाठ्यक्रमों में भारी असमानता।
मूल्यांकन (एग्जाम) प्रणाली में अंतर।
निजी स्कूलों की अनियंत्रित फीस।
शिक्षा का बढ़ता व्यवसायीकरण।
ज्ञापन में केंद्र सरकार से राष्ट्रीय शैक्षिक मानकीकरण अधिनियम तैयार करने की मांग करते हुए सुझाव दिए गए हैं:
समान पाठ्यक्रम: कक्षा 1 से विश्वविद्यालय स्तर तक न्यूनतम समान राष्ट्रीय पाठ्यक्रम।
समान परीक्षा: देशभर में एक जैसी परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली।
फीस नियमन: निजी विद्यालयों के लिए सख्त शुल्क नियामक तंत्र।
ज्ञापन प्रेषकों का कहना है कि समान शिक्षा व्यवस्था लागू होने से देश के प्रत्येक छात्र को बराबरी का अवसर मिलेगा और शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी एवं न्यायसंगत बन सकेगी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा मानकीकरण आयोग के गठन और समान पाठ्यक्रम निर्माण को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव भी रखा है।
