Published:
20 Feb 2026, 10:03 AM
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Updated:
20 Feb 2026, 10:05 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
क्षेत्रीय डेस्क। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सड़कें इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि विनाश की इबारत लिख रही हैं। बेरोकटोक दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों ने न केवल सड़कों को छलनी कर दिया है, बल्कि राहगीरों की जान का दुश्मन भी बन गए हैं। आलम यह है कि घर से स्कूल के लिए निकलने वाले मासूम बच्चों के अभिभावक तब तक चैन की सांस नहीं लेते, जब तक बच्चा सुरक्षित घर न लौट आए।
लगातार गुजर रहे ओवरलोड ट्रकों के पहियों ने मजबूत सड़कों को भी धूल में मिला दिया है। जगह-जगह हुए गहरे गड्ढे अब जानलेवा साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रूप से चल रहे इस कारोबार की जानकारी अधिकारियों को भी है, लेकिन कई बार गुहार लगाने के बावजूद स्थिति 'जस की तस' बनी हुई है। प्रशासन की इस बेरुखी से स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बेदी ग्रुप) के जिला अध्यक्ष मोहम्मद आलिम ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि ओवरलोड वाहन न केवल सार्वजनिक संपत्ति (सड़कों) को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं का मुख्य कारण भी बन रहे हैं। आलिम ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "प्रशासन हमारी चुप्पी को कमजोरी न समझे। अगर जल्द ही इन ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो हम कार्यालयों का घेराव करेंगे।"
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही जिला प्रशासन को एक औपचारिक शिकायत सौंपी जाएगी। यदि इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। भाकियू नेताओं का कहना है कि आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या जन-धन की हानि के लिए पूरी तरह से जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा।
ग्रामीणों की पीड़ा: "सुबह के समय जब बच्चे स्कूल जाते हैं, तो इन ट्रकों की वजह से सड़क पर पैर रखने की जगह नहीं होती। धूल और शोर के बीच हमारे बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करते हैं। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?"
