Published:
17 Feb 2026, 11:40 AM
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Updated:
17 Feb 2026, 11:41 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) के दुर्लभ वन्यजीवों और बाघों के कुनबे को मानवीय दखल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे 2 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) घोषित कर दिया है। इस फैसले से रिजर्व के पारिस्थितिक तंत्र को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, लेकिन इसके दायरे में आने वाले 230 गांवों में अब कई व्यावसायिक गतिविधियों पर ब्रेक लग जाएगा।
कुल क्षेत्रफल: 575 वर्ग किलोमीटर।
विस्तार की सीमा: उत्तर में उत्तराखंड और उत्तर-पूर्व में नेपाल सीमा होने के कारण वहां विस्तार 0 किमी है। पीलीभीत के ग्रामीण इलाकों और शाहजहाँपुर की ओर यह 1 से 2 किमी तक फैला है।
** PTR का दायरा:** रिजर्व कुल 730.24 वर्ग किमी में फैला है, जिसमें 602.79 वर्ग किमी कोर और 127.45 वर्ग किमी बफर क्षेत्र है।
सरकार ने इस जोन में गतिविधियों को तीन हिस्सों में बांटा है:
1. पूरी तरह प्रतिबंधित (Prohibited):
नए खनन और पत्थरों का उत्खनन।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, आरा मिलें और ईंट-भट्ठे।
व्यावसायिक रूप से लकड़ी का उपयोग और जल निकायों में कचरा बहाना।
2. विनियमित (Regulated):
होटल और रिसॉर्ट: रिजर्व की सीमा से 1 किमी के भीतर नए निर्माण पर रोक। इसके बाहर भी निर्माण 'पर्यटन महायोजना' के तहत होगा।
पेड़ों की कटाई: बिना अनुमति एक भी पेड़ नहीं कटेगा।
आवागमन: रात के समय वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण रहेगा।
3. संवर्धित (Promoted):
जैविक खेती (Organic Farming), वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
कुटीर उद्योग और हरित तकनीक के लिए सरकार मदद करेगी।
अधिसूचना के अनुसार पीलीभीत और शाहजहाँपुर की तहसीलों के 230 गांव इस दायरे में हैं। इनमें मुख्य रूप से:
प्रमुख कॉलोनियां: माला गोयल कॉलोनी, माला कॉलोनी, पांडे कॉलोनी, गांधीनगर, कलकत्ता कॉलोनी, मटैना कॉलोनी।
ग्रामीण क्षेत्र: गजरौला कला, पंडारा, रायपुर मु. रामपुर, पिपरिया करम, शिव नगर, बड़ी और छोटी महदिया, माधोपुर, चंदोइया, आनंदपुर, शेरपुर, घुंघचाई।
तराई के गांव: बिशनपुर, लालपुर, सकरिया सिसैया, भोपतपुर, बलदेवपुर, सैदुल्लागंज और टंडोला।
प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) मनीष सिंह ने बताया कि अगले दो वर्षों में राज्य सरकार स्थानीय लोगों के परामर्श से एक ‘आंचलिक महायोजना’ तैयार करेगी। इसकी निगरानी जिलाधिकारी पीलीभीत की अध्यक्षता में गठित 'निगरानी समिति' करेगी।
"यह प्रारूप अधिसूचना है। यदि किसी व्यक्ति या संस्था को इससे आपत्ति है, तो वे अगले 60 दिनों के भीतर पर्यावरण मंत्रालय को अपने सुझाव या आपत्तियां लिखित में भेज सकते हैं।" — मनीष सिंह, DFO, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत टाइगर रिजर्व न केवल बाघों, बल्कि बंगाल फ्लोरिकन, हिस्पिड खरगोश और हिरणों की पांच दुर्लभ प्रजातियों का घर है। 2 किमी का यह गलियारा वन्यजीवों और मानव के बीच होने वाले संघर्ष को कम करने में 'बफर' का काम करेगा।
