Published:
03 Apr 2026, 11:17 AM
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Updated:
03 Apr 2026, 11:19 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
देहरादून के पॉश राजपुर रोड इलाके में 1900 वर्गमीटर जमीन को लेकर सामने आया लैंड स्कैम केवल संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित दस्तावेजी अपराध है। 1985 की संपत्ति को निशाना बनाते हुए 2016 में कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई और एकतरफा डिक्री हासिल कर सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अदालत द्वारा निरस्त की गई पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर ही 28 जुलाई 2025 को जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। इस पूरे खेल में कथित तौर पर राजीव बेरी और नितिन बाटला गुट के बीच सांठगांठ सामने आई, जिन्होंने विवादित जमीन को बेचने की रणनीति बनाई। रजिस्ट्री में संदिग्ध गवाहों की भूमिका और ‘फर्जी ऊषा मलिक’ की पहचान बड़ा सवाल बनी हुई है। करोड़ों की इस जमीन को मंजीत जौहर समेत अन्य के नाम ट्रांसफर किया गया, जबकि प्रशासन और राजस्व विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला देहरादून के प्रॉपर्टी बाजार में सक्रिय व्हाइट कॉलर सिंडिकेट के नेटवर्क को उजागर करता है, जो कानूनी खामियों का फायदा उठाकर विवादित संपत्तियों पर कब्जा करने का प्रयास करता है।
