हरिद्वार: रमजान का मुकद्दस महीना शुरू, बाजारों में रौनक; जानें इस बार क्यों है खास।

Published: 20 Feb 2026, 11:32 AM   |   Updated: 20 Feb 2026, 11:33 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

हरिद्वार। अल्लाह की इबादत और बरकतों का महीना 'रमजान' कल से शुरू हो गया है। इस्लामिक कैलेंडर के नौवें और सबसे पवित्र महीने के आगमन के साथ ही फिजाओं में एक अलग ही रूहानियत घुल गई है। इस बार का रमजान कई मायनों में खास है, क्योंकि पूरे महीने में पांच 'जुमा' पड़ रहे हैं, जिसे बेहद शुभ माना जा रहा है। 20 मार्च को आखिरी जुमे के साथ ही रोजेदार इस मुकद्दस सफर के समापन की ओर बढ़ेंगे।

इतिहास की रोशनी: जब मिला कुरान का नूर

मान्यता है कि सन 610 में 'लैलतुल कद्र' के मौके पर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब को पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ था। तभी से इस महीने को इस्लाम में सबसे ऊँचा दर्जा दिया गया है। यह महीना केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के लालच, झूठ और बदनामी जैसे बुरे विचारों को त्यागने की एक आत्मिक यात्रा है।

तीन चरणों में बंटा है रहमतों का सफर

रमजान के तीस दिनों को तीन हिस्सों (अशरों) में बांटा गया है:

  1. पहला अशरा (शुरुआती 10 दिन): इसे 'रहमतों का दौर' कहा जाता है।

  2. दूसरा अशरा (अगले 10 दिन): यह 'माफी (मगफिरत) का दौर' माना गया है।

  3. तीसरा अशरा (आखिरी 10 दिन): यह 'जहन्नुम से मुक्ति' का दौर बताया गया है।

बाजारों में रौनक: खजले और फेनी की बढ़ी मांग

रमजान का चांद नजर आते ही हरिद्वार के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी गई। सहरी और इफ्तार के लिए जरूरी सामानों की खरीदारी के लिए लोग बड़ी संख्या में बाहर निकल रहे हैं। विशेष रूप से पापे, फेनी और खजले की दुकानें सज गई हैं। खजूर की विभिन्न किस्मों की मांग सबसे अधिक है। दुकानदारों का कहना है कि पहले जुमे के मौके पर बाजार में भारी भीड़ रही, जिससे कारोबारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं।

रूहानी पैगाम:  रोजा रखने का असली मकसद 'तकवा' (परहेजगारी) प्राप्त करना है। यह महीना हमें सिखाता है कि कैसे अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाकर मानवता और अल्लाह की राह पर चला जाए। महीने भर की इस कठिन इबादत के बाद 'ईद-उल-फितर' का तोहफा मिलता है।

वीडियो और देखें
×