Published:
22 Feb 2026, 04:05 PM
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Updated:
22 Feb 2026, 04:10 PM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
रामनगर का अग्रवाल सभा भवन 21 और 22 फरवरी को वैज्ञानिक चेतना की ऊर्जा से सराबोर नजर आया। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से पहुंचे तर्कशील संगठनों और प्रतिनिधियों ने यहां न केवल विचार-विमर्श किया, बल्कि समाज में वैज्ञानिक सोच की मशाल को और प्रज्वलित करने का संकल्प भी लिया।
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर तहसील सोसाइटी पंजाब कॉर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष जसवंत मोहाली ने संविधान की धारा 51(ए)(एच) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और ज्ञानार्जन की भावना को बढ़ावा दे। उन्होंने चिंता जताई कि आज भी समाज में अंधविश्वास और कूपमंडूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है और कई बार सत्ता भी इस प्रवृत्ति को रोकने में विफल रहती है।
साइंस फॉर सोसाइटी के संयोजक मदन सिंह ने कहा कि जब तक वैज्ञानिक सोच के लिए काम करने वाले संगठन एक मंच पर नहीं आएंगे, तब तक तर्कशील आंदोलन को व्यापक ताकत नहीं मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूत नींव पर टिका है, और इन्हीं मूल्यों की रक्षा के लिए साझा प्रयास जरूरी हैं।
सम्मेलन के दौरान सभी संगठनों और प्रतिनिधियों ने साझा मंच को औपचारिक रूप देते हुए नेशनलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया नॉर्थ जोन का गठन किया। यह निर्णय तर्कशील आंदोलन को संगठित दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि यह मंच वैज्ञानिक चेतना के प्रसार और संविधानिक मूल्यों की स्थापना में अहम भूमिका निभाएगा।
22 फरवरी की शाम आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों को रोमांचित भी किया और सोचने पर मजबूर भी। पंजाब से आए रामकुमार ने हवा से सोने की चेन निकालने और त्रिशूल को जीभ के आर-पार करने जैसे तथाकथित ‘चमत्कार’ दिखाकर यह साबित किया कि ये सब विज्ञान और तकनीक के जरिए संभव भ्रम हैं।
उन्होंने खुले मंच से ढोंग-पाखंड करने वालों को चुनौती देते हुए कहा कि जेब में रखे नोट का नंबर बताने, हवा से वस्तु पैदा करने, बिना जले आग पर चलने या पानी पर चलने जैसी 23 शर्तों में से कोई भी एक सिद्ध कर दे, तो उसे 5 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। उनका संदेश स्पष्ट था—चमत्कार नहीं, विज्ञान पर भरोसा कीजिए।
महिला तर्कशील हरेंद्र कौर ने भी विज्ञान आधारित प्रयोगों का प्रदर्शन करते हुए कहा कि दुनिया में चमत्कार जैसी कोई चीज नहीं होती। उन्होंने कहा कि ढोंगी बाबा विज्ञान की तकनीकों का इस्तेमाल कर भोली-भाली जनता को भ्रमित करते हैं और करोड़ों की संपत्ति इकट्ठा कर लेते हैं। उनका आह्वान था—“सवाल पूछिए, जिज्ञासु बनिए और हर बात को परखिए।”
सम्मेलन में तर्कशील सोसायटी पंजाब, साइंस फॉर सोसाइटी यूनाइटेड, तर्कशील सोसायटी हरियाणा, ज्ञान विज्ञान समिति हरियाणा, नागरिक सामाजिक बल राजस्थान, अग्रगामी छात्र नौजवान सभा दिल्ली, आरंभ युवा मंच झारखंड और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की खास बात रही महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी। सभागार में मौजूद युवा चेहरे इस बात का संकेत दे रहे थे कि आने वाला समय वैज्ञानिक सोच और तार्किक संवाद का होगा।
दो दिनों तक चले इस सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि अंधविश्वास के अंधेरे को दूर करने के लिए एकजुट प्रयास जरूरी हैं। रामनगर से उठी यह आवाज अब उत्तर भारत में वैज्ञानिक चेतना की नई लहर बनकर फैलने को तैयार है।
