शिवालिकनगर में भव्य होली मिलन: कुमाऊँ की संस्कृति और एकता का अनोखा संगम

Published: 23 Feb 2026, 10:48 AM   |   Updated: 23 Feb 2026, 11:05 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

शिवालिकनगर में कुमाऊँ की संस्कृति और होली की खुशियों का अनूठा संगम देखने को मिला, जब ‘कुमाऊँनी एकता समिति’ ने भव्य होली मिलन समारोह आयोजित किया। समारोह का उद्घाटन महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतानंद महाराज और महामंडलेश्वर मां संतोषी माता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया, जिससे पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा और उल्लास का वातावरण बन गया।

संगठन और समाज की ताकत:
मां संतोषी माता ने अपने संबोधन में कहा, “कलयुग में संगठन ही सबसे बड़ी शक्ति है। जिस प्रकार रस्सी मजबूत होने पर कुएँ से जल खींचा जा सकता है, वैसे ही संगठित समाज असंभव कार्यों को संभव बना सकता है।” उन्होंने कुमाऊँनी समाज की सरलता और निष्कपट स्वभाव की प्रशंसा की और एक सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया।

स्वामी हरिचेतानंद महाराज ने सामाजिक सेवा और वितरण पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय संचय का नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद और सेवा का है। उन्होंने सुझाव दिया कि समाज को एक ऐसा ‘कोष’ बनाना चाहिए जिससे समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम:
कार्यक्रम की शुरुआत मनगणेश वंदना और मंगलाचरण से हुई, जिसके बाद कुमाऊँ की प्रसिद्ध खड़ी होली और बैठकी होली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

  • कृपाल नगर, शिवालिकनगर और हरि आश्रय कॉलोनी के महिला-पुरुष समूहों ने पारंपरिक होली गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी।

  • सान्वी मर्तोलिया, इशानी मर्तोलिया, हर्षिता चंद, खुशी जीना, काजल साही और मेघा राणा के मोहक नृत्यों ने दर्शकों का मन मोहा।

  • इंशिता बसेड़ा के एकल नृत्य और 'दीप गंगा' समूह के 'पहाड़ी फ्यूजन' ने आधुनिकता और परंपरा का संगम प्रस्तुत किया।

‘मिनी कुमाऊँ’ की पहचान:
कुमाऊँनी एकता समिति का उद्देश्य हरिद्वार में ‘मिनी कुमाऊँ’ की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना है। यह संगठन केवल उत्सव तक सीमित नहीं है; शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंदों की सहायता में भी समिति सक्रिय है।

समारोह का समापन:
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी और पारंपरिक कुमाऊँनी व्यंजनों का आनंद लिया।

उल्लेखनीय उपस्थितियां:
विधायक आदेश चौहान, नगरपालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, बीडी जोशी और समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र चौहान सहित कई गणमान्य लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ललित मोहन जोशी ने किया।

यह भव्य आयोजन न केवल कुमाऊँनी संस्कृति का उत्सव था, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखने का संदेश भी था।

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