Published:
15 Dec 2025, 08:56 AM
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Updated:
15 Dec 2025, 08:55 AM
Category:
राष्ट्रीय
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By: Admin
अयोध्या स्थित रामलला का भव्य मंदिर आज विश्वभर के सनातन धर्मावलंबियों की आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बन चुका है। राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में माता सीता के आशीर्वाद से संचालित सीता रसोई श्रद्धालुओं के लिए केवल भोजनालय नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक तृप्ति का प्रतीक बन गई है।
सीता रसोई के संयोजक राजेंद्र सिंह पंकज ने बताया कि अयोध्या अब पूरे देश की श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 35 से 40 हजार श्रद्धालु यहां प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण करते हैं।
सप्ताहांत में यह संख्या 50 हजार तक पहुंच जाती है, जबकि पर्वों और विशेष अवसरों पर 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है।
रसोई प्रभारी धनंजय पाठक ने बताया कि सीता रसोई बीते 25 वर्षों से निरंतर सेवा भाव से संचालित की जा रही है। यहां भोजन को प्रसाद मानकर तैयार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक मशीनों की सहायता से प्रति घंटे 5,000 रोटियां तैयार की जाती हैं और संपूर्ण भोजन स्टील के बर्तनों में शुद्धता के साथ बनाया जाता है।
रामलला के लिए छप्पन भोग भी यहीं से तैयार किया जाता है।
रसोई कर्मी सुरेश दास ने कहा कि यहां कार्य करना नौकरी नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम की सेवा है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद परोसने से उन्हें आत्मिक संतोष प्राप्त होता है।
भोजन वितरण में लगे कालिंदी मिश्रा और अनीता वर्मा ने कहा कि श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतोष और भक्ति भाव देखकर सारी थकान दूर हो जाती है। यहां सभी को समान भाव से प्रसाद दिया जाता है, यही सीता रसोई की पहचान है।
प्रसाद ग्रहण करने आए श्रद्धालु कृपा शंकर मिश्रा ने कहा कि दर्शन के बाद ऐसा लगता है जैसे माता सीता का आशीर्वाद थाली में प्राप्त हो रहा हो।
वहीं बसंत कुंद्रा ने व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे अद्भुत कार्य बताया। मनोहर सिंह शाही ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया, जबकि बाबू यावलकर ने कहा कि सीता रसोई वास्तव में सेवा और श्रद्धा का संगम है।
सीता रसोई के भविष्य को लेकर बताया गया कि आने वाले समय में एक विशाल ढांचा विकसित किया जाएगा, जिसमें एक समय में एक लाख श्रद्धालुओं को भोजन कराने की व्यवस्था होगी।
आज सीता रसोई अयोध्या में रामभक्ति, सेवा, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों की जीवंत मिसाल बन चुकी है।
