Published:
02 May 2026, 11:10 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
चमोली। भू-धंसाव की मार झेल रहे ज्योतिर्मठ में शुरू हुए भूमि स्थिरीकरण कार्य अब विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षात्मक कार्य प्रभावित क्षेत्रों में न होकर केवल सरकारी भूमि तक सीमित हैं। जिससे एजेंसियों की कार्यप्रणाली और मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जोशीमठ भू-धंसाव के बाद पूरे नगर को 14 सेक्टरों में बांटा गया था। जहां वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षात्मक कार्य किए जाने थे। ग्रामीणों का कहना है कि जिन इलाकों में भू-धंसाव से मकान, खेत और निजी संपत्तियां प्रभावित हुई हैं, वहां कोई ठोस कार्य नहीं हो रहा है। इसके उलट, सरकारी जमीनों पर ही काम तेजी से किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन के साथ बैठक कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि यदि प्रभावित निजी क्षेत्रों में भी समान रूप से कार्य नहीं हुआ, तो वे मौजूदा कार्यों को रुकवाने के लिए मजबूर होंगे।
वहीं, जोशीमठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ का कहना है कि सभी कार्य वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट के आधार पर ही किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि लोगों को किसी प्रकार की शंका है तो जल्द ही सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर समाधान निकाला जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भूमि स्थिरीकरण के साथ-साथ ड्रेनेज और सीवर से जुड़े कार्य भी जल्द शुरू किए जाएंगे।
बता दें करीब तीन वर्षों के इंतजार के बाद जोशीमठ में लगभग 16.40 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य शुरू हुए हैं, लेकिन शुरुआत में ही उठे विवादों ने इन योजनाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और स्थानीय जनता के बीच तालमेल बन पाता है या नहीं, और क्या प्रभावित क्षेत्रों को वास्तव में राहत मिल पाती है।
