यूपीसीएल की बकायेदार सूची में मंत्री से जुड़ा नाम, पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल

Published: 23 Feb 2026, 08:46 AM   |   Updated: 23 Feb 2026, 08:47 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

“रोशनी बांटने वालों पर ही जब बकाया की छाया पड़े, तो जवाबदेही की लौ और तेज जलनी चाहिए।”

उत्तराखंड में ऊर्जा निगम Uttarakhand Power Corporation Limited (यूपीसीएल) द्वारा जारी शीर्ष विद्युत बकायेदारों की सूची ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सूची में राज्य सरकार की कैबिनेट मंत्री Rekha Arya से जुड़े एक व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन का नाम शामिल होने से मामला सुर्खियों में आ गया है।

क्या है मामला?

यूपीसीएल के अभिलेखों के अनुसार कौसानी स्थित ‘रुद्राक्ष पैलेस’ होटल के व्यावसायिक बिजली कनेक्शन पर 2,98,704 रुपये का बकाया दर्शाया गया है। बताया जा रहा है कि यह कनेक्शन मंत्री रेखा आर्या के नाम पर पंजीकृत है। स्थानीय स्तर पर जब बकायेदारों की सूची सार्वजनिक हुई तो यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

सूची में मंत्री के साथ उनके पति का नाम भी दर्ज होने की बात सामने आई है, जिससे प्रकरण को लेकर सवाल और गहराए हैं।

पूर्व मंत्री का नाम भी सूची में

इसी सूची में दिवंगत पूर्व मंत्री एवं विधायक Chandan Ram Dass के नाम पर 2,85,990 रुपये का बकाया दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। इससे बिजली बिल वसूली की प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

विपक्ष ने साधा निशाना

मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इसे सार्वजनिक जीवन में नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे समय पर सरकारी देनदारियों का भुगतान कर जनता के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें।

वसूली लक्ष्य और वास्तविकता

ऊर्जा निगम को चालू वित्तीय वर्ष में 7 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य दिया गया है, जबकि अब तक लगभग 2.45 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार 25 हजार रुपये से अधिक बकाया रखने वाले 63 उपभोक्ताओं के विद्युत संयोजन काटे जा चुके हैं और अभियान जारी है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक यूपीसीएल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं मंत्री रेखा आर्या की ओर से भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

अब प्रदेश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि संबंधित पक्ष इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और बकाया भुगतान को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

यह प्रकरण एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, समान नियमों की अनुपालना और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता नजर आ रहा है—क्योंकि जब बात सार्वजनिक पदों की हो, तो सवाल भी सार्वजनिक ही उठते हैं।

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