Published:
18 Feb 2026, 06:54 AM
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Updated:
18 Feb 2026, 06:55 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
देहरादून। अक्सर सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू होने के महीनों बाद तक छात्र बिना किताबों के स्कूल जाने को मजबूर होते थे। कभी टेंडर में देरी तो कभी छपाई में सुस्ती का खामियाजा मासूम बच्चों की पढ़ाई भुगतती थी। लेकिन इस बार धामी सरकार के शिक्षा विभाग ने इस परिपाटी को बदलने की ठान ली है। प्रदेश में पहली बार नया सत्र शुरू होने से पहले ही किताबों का वितरण पूरा करने की तैयारी है।
9.73 लाख बच्चों के चेहरों पर आएगी मुस्कान माध्यमिक शिक्षा निदेशक मुकुल कुमार सती ने बताया कि विभाग ने इस वर्ष के लिए बहुत ही सटीक और आक्रामक लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर के 9.73 लाख छात्र-छात्राओं के लिए कुल 82 लाख 45 हजार से अधिक किताबें छापी जा रही हैं।
कक्षा 1 से 8: 6.29 लाख विद्यार्थियों को मिलेंगी 43.78 लाख किताबें।
कक्षा 9 से 12: 3.44 लाख विद्यार्थियों को दी जाएंगी 38.67 लाख किताबें।
इंतजार का दौर खत्म, पढ़ाई की शुरुआत अब समय पर बीते वर्षों में देखने को मिलता था कि आधा सत्र बीत जाने के बाद भी बच्चों के हाथों में किताबें नहीं होती थीं। कई बार तो छह से सात महीनों का लंबा इंतजार करना पड़ता था। विभाग ने इस बार अग्रिम योजना (Advance Planning) बनाई है। ब्लॉक और जिला स्तर पर चरणबद्ध तरीके से वितरण की निगरानी स्वयं उच्चाधिकारी कर रहे हैं। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि 28 मार्च की डेडलाइन किसी भी हाल में पार नहीं होनी चाहिए।
शैक्षणिक गुणवत्ता में होगा सुधार शिक्षा विभाग का मानना है कि सत्र के पहले दिन से ही किताबें उपलब्ध होने से शिक्षकों को भी पाठ्यक्रम पूरा कराने में आसानी होगी और छात्रों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में इसे एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। अब सरकारी स्कूल का बच्चा भी प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर पहले ही दिन से अपनी नई किताबों की खुशबू के साथ पढ़ाई शुरू कर सकेगा।
