बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड: हाईकोर्ट से सरकार को बड़ी राहत, समय से पहले दाखिल याचिका खारिज; कोर्ट बोला- 'नोटिस मिलने पर आएं'

Published: 17 Feb 2026, 07:08 AM   |   Updated: 17 Feb 2026, 07:21 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

नैनीताल/देहरादून। राजधानी देहरादून को जाम के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए प्रस्तावित बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड परियोजना के खिलाफ दायर जनहित याचिका को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि याचिका 'प्री-मैच्योर' (समय से पूर्व) है।

क्या था मामला? (Key Highlights)

  • याचिकाकर्ता की दलील: देहरादून निवासी खुर्शीद अहमद ने याचिका में दावा किया था कि इस मेगा प्रोजेक्ट से सैकड़ों लोगों के घर और जमीन छिन जाएगी। साथ ही उन्होंने रिस्पना-बिंदाल क्षेत्र की मिट्टी की भार क्षमता और पर्यावरणीय जोखिमों पर भी सवाल उठाए थे।

  • सरकार का पलटवार: राज्य सरकार ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा कि अभी तक याचिकाकर्ता को भूमि अधिग्रहण का कोई नोटिस तक नहीं दिया गया है, ऐसे में यह आशंका केवल काल्पनिक है।

  • कोर्ट का फैसला: खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक विधिवत नोटिस जारी नहीं होता, तब तक याचिका विचारणीय नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भविष्य में सक्षम मंच पर अपनी बात रखने की स्वतंत्रता दी है।

क्यों अहम है यह फैसला?

  1. न्यायिक स्पष्टता: यह निर्णय साफ करता है कि बुनियादी ढांचे के बड़े प्रोजेक्ट्स में अदालती हस्तक्षेप तभी होगा जब प्रक्रिया कानूनी रूप से आगे बढ़े।

  2. सरकार को ग्रीन सिग्नल: कोर्ट के इस रुख से सरकार को सीमांकन और प्रारंभिक कागजी कार्रवाई तेज करने का मौका मिल गया है।

  3. विस्थापन का डर: नदियों के किनारे बसे लगभग 2600 से अधिक परिवारों के लिए अभी खतरा टला नहीं है, लेकिन अब कानूनी लड़ाई नोटिस मिलने के बाद ही शुरू होगी।

भविष्य की चुनौती: अधिग्रहण बनाम विकास

भले ही हाईकोर्ट ने अभी याचिका खारिज कर दी हो, लेकिन जैसे ही प्रशासन नोटिस बांटना शुरू करेगा, विरोध के स्वर फिर तेज हो सकते हैं। ₹6225 करोड़ के इस भारी-भरकम बजट वाले प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय क्लीयरेंस और पुनर्वास की चुनौती सरकार के सामने पहाड़ की तरह खड़ी है।

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