Published:
24 Feb 2026, 11:00 AM
|
Updated:
24 Feb 2026, 11:01 AM
Category:
उत्तराखंड
|
By: Admin
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत सतर्कता अधिष्ठान (Vigilance) ने मंगलवार को हरिद्वार में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। राज्य कर विभाग (GST) कार्यालय के खंड-3 में तैनात एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब आरोपी एक उद्योगपति से पुराने वैट मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे ले रहा था।
शिकायतकर्ता, जो एक उद्योग संचालक हैं, ने विजिलेंस को दी तहरीर में बताया कि उनकी 'हिमांशी पैकेजिंग इंडस्ट्री' साल 2021 में ही बंद हो चुकी है। जीएसटी लागू होने से पहले, साल 2017 के अंतिम तीन महीनों का वैट (VAT) बकाया करीब ₹1.76 लाख था। इस मामले को विभागीय कागजों में 'सेटल' करने के नाम पर वहां तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रमोद सेमवाल ने खेल शुरू कर दिया।
आरोप है कि प्रमोद सेमवाल ने इस सरकारी देनदारी को कम करने या खत्म कराने के बदले शिकायतकर्ता से ₹1.20 लाख की अवैध मांग की थी। परेशान होकर उद्योगपति ने विजिलेंस का दरवाजा खटखटाया। गोपनीय जांच में मामला सही पाए जाने पर सतर्कता विभाग ने एक ट्रैप टीम तैयार की।
मंगलवार को जैसे ही प्रमोद सेमवाल ने सहायक आयुक्त राज्य कर कार्यालय के पास रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹20,000 पकड़े, वैसे ही सादे कपड़ों में तैनात विजिलेंस की टीम ने उसे दबोच लिया। हाथ धुलवाते ही उसके हाथ गुलाबी हो गए, जिससे मौके पर ही रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी प्रमोद सेमवाल, निवासी कनखल (हरिद्वार), पिछले 18 वर्षों से उपनल (UPNL) के माध्यम से विभाग में कार्यरत था। इतने लंबे समय तक एक ही विभाग में रहने के कारण वह विभागीय बारीकियों और पुराने मामलों के दांव-पेच से वाकिफ था, जिसका फायदा उठाकर वह लोगों को चूना लगा रहा था।
"भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस नेटवर्क में क्या अन्य अधिकारी भी शामिल हैं, इसकी गहनता से जांच की जा रही है।" — सतर्कता अधिष्ठान अधिकारी
इस गिरफ्तारी के बाद राज्य कर विभाग में हड़कंप मच गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अब पुराने लंबित वैट मामलों की फाइलों की दोबारा समीक्षा की जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी तो इस तरह के 'सेटलमेंट' का खेल नहीं चल रहा है।
