Published:
15 Dec 2025, 07:46 AM
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Updated:
15 Dec 2025, 07:47 AM
Category:
राष्ट्रीय
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By: Admin
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के धारा नौला गांव की कविता चंद ने 14 दिसंबर 2025 को अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विंसन (4,892 मीटर) पर सफल चढ़ाई कर इतिहास रच दिया। इस शिखर पर भारतीय तिरंगा फहराना न केवल देश के लिए, बल्कि उत्तराखंड के लिए भी गर्व का क्षण है। मुंबई में रहने वाली कविता की यह उपलब्धि बेहद कठिन और जोखिम भरे अभियानों में से एक मानी जा रही है।
कविता की यह चढ़ाई उनके प्रतिष्ठित ‘सेवन समिट्स’ मिशन का अहम पड़ाव है, जिसमें दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करना शामिल है। इससे पहले वह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस पर भी सफल चढ़ाई कर चुकी हैं। इस उपलब्धि के बाद वे वैश्विक चुनौती को पूरा करने के और करीबपहुंच गई हैं।
कविता का अभियान 3 दिसंबर 2025 को भारत से शुरू हुआ। 4 दिसंबर को वह चिली के पुंटा एरेनास पहुंचीं, और 7 दिसंबर को यूनियन ग्लेशियर के लिए उड़ान भरी गई। बेस कैंप तक की यात्रा में 40 मिनट की स्की-सुसज्जित उड़ान ने इस अभियान की जटिलता और जोखिम को दर्शाया।
अभियान का नेतृत्व हाई-एल्टीट्यूड गाइड मिंग्मा डेविड शेरपा ने किया। भारतीय दल में पर्वतारोही भरत थम्मिनेनी और उनकी एक्सपेडिशन कंपनी ‘बूट्स एंड क्रैम्पन’ का सहयोग शामिल था। नौ सदस्यीय टीम ने कठिन मौसम, अत्यधिक ठंड और पूर्ण एकांत जैसी चुनौतियों के बावजूद सावधानीपूर्वक योजना और एक्लिमेटाइजेशन के साथ शिखर तक पहुंच बनाई।
कविता ने कहा, “माउंट विंसन के शिखर पर भारतीय तिरंगा फहराना मेरे लिए शब्दों से परे सम्मान का क्षण है। फिटनेस, महत्वाकांक्षा और करियर की सफलता एक साथ आगे बढ़ सकती हैं, बशर्ते संकल्प और अनुशासन बना रहे।”
कविता मैरेथन धावक भी हैं। वह दिल्ली और मुंबई हाइरॉक्स 2025 प्रतियोगिताओं में विजेता रह चुकी हैं और एबॉट वर्ल्ड मैराथन मेजर्स सिक्स स्टार चैलेंज में भी हिस्सा लिया।
मीडिया क्षेत्र में काम करने वाली कविता ने 2024 में कॉरपोरेट करियर छोड़कर पूर्णतः फिटनेस और पर्वतारोहण अपनाया। 2017 में दौड़ना शुरू करने वाली कविता आज उन पेशेवरों के लिए प्रेरणा हैं, जो संतुलित और स्वस्थ जीवन की तलाश में हैं।
कविता के पति दीपक चंद ठाकुर, जो एनपीएसटी के सीईओ और सह-संस्थापक हैं, ने पूरे अभियान में निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान किया। परिवार के सहयोग ने उनके साहसिक अभियानों को और मजबूती दी।
