22 साल के रिश्ते के बावजूद गंभीर अपराधों की जांच जरूरी: हाईकोर्ट

Published: 04 Nov 2026, 03:39 PM   |   Updated: 04 Nov 2026, 03:39 PM
Category: राज्य   |   By: Rishikesh Darpan

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गिरधारी लाल साहू की उस दलील को खारिज कर दिया है कि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के साथ उनका 22 साल का रिश्ता उनके खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों को महज एक घरेलू विवाद बना देता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतने लंबे समय तक चले रिश्ते के बावजूद, बाद में होने वाले गंभीर अपराधों या क्रूरता की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।

गिरधारी लाल साहू ने अपनी याचिका में देहरादून में रेखा आर्या द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। उनके वकीलों ने तर्क दिया कि दोनों की शादी 06 जुलाई 2004 को हुई थी और इतने वर्षों तक साथ रहने के कारण यह मामला सिर्फ 'घरेलू विवाद' की श्रेणी में आता है, जिसे अब 'आपराधिक रंग' दिया जा रहा है।

हालांकि, रेखा आर्या ने साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाना, अन्य महिलाओं से अवैध संबंध, मारपीट, गाली-गलौज, जातिसूचक अपमान और कंपनी के निदेशक पद से फर्जी दस्तावेजों के जरिए जबरन सेवानिवृत्त दिखाना शामिल है। सबसे गंभीर आरोप एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से संबंधित है, जिसमें साहू द्वारा कथित तौर पर रेखा आर्या को रास्ते से हटाने (कत्ल करने) की साजिश रचने की बात सामने आई थी।

न्यायमूर्ति आलोक महरा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि ये आरोप केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव से कहीं अधिक हैं। अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूट रचना, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध शामिल हैं।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ऑडियो रिकॉर्डिंग और फर्जी दस्तावेजों की सत्यता की जांच और विचारण होना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के भजलाल और निहारिका इन्फ्रास्ट्रक्चर मामलों के सिद्धांतों का हवाला देते हुए, हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर अदालत 'मिनी-ट्रायल' नहीं कर सकती। इन सब तथ्यों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने का कोई आधार नहीं पाया और गिरधारी लाल साहू की रिट याचिका खारिज कर दी।

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